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कोर्ट के आदेश ताक पर रख पुलिस ने अपनों को बचाया

5 वर्ष पहले
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मारपीटके मामले में कोर्ट के आदेशों के बावजूद पुलिस ने अपनों को बचाने के लिए तीन पुलिस जवानों पर केस दर्ज नहीं किया। जांच का हवाला देकर उन्हें सीधे बचा लिया और 11 में से 8 पर ही केस दर्ज किया। अब पीड़ित ने दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी है। इन तीन पुलिस वालों पर आरोप है कि मारपीट मामले में इन्होंने अपने जानकारों को बचाने के लिए पद का दुरुपयोग किया। मारपीट के मामले में केस दर्ज करने के बजाय शांति भंग करने की ही कार्रवाई की। इसके चलते उन्हें एसडीएम कोर्ट से तुरंत छोड़ दिया गया। किलोई खास निवासी लख्मीचंद पर उसके पड़ोस में रहने वाले एक परिवार ने घर में घुस कर हमला किया था। पीजीआई के आपात विभाग में इलाज हुआ। आरोप है कि सदर थाना पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि थाने में एक आरोपी का साला बतौर ईएएसआई तैनात था। इसके बाद वह कोर्ट गया।

अधिवक्ता अशोक कादियान ने बताया कि कोर्ट ने सदर थाना प्रभारी विजय दहिया, ईएएसआई रामनिवास, हेड कांस्टेबल अमित के अलावा लखमी से मारपीट करने वाले आठ अन्य के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए थे, लेकिन पुलिस वालों को बचाया गया। यह कोर्ट की अवमानना है। अदालत में अपील की जाएगी। वहीं, सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विजय दहिया ने बताया कि इस्तगासे का मामला अाया है। उसकी खुद डीएसपी ने जांच की थी। जांच के बाद केस दर्ज कर लिया गया है। केस में भी उस बारे में जांच का ब्यौरा दिया गया है।

तीन पुलिस वालों पर नहीं किया केस दर्ज

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