महिलाओं के लिए संवेदनशील माहौल बनाने मानसिक परिवर्तन की जरूरत
समाजमें व्यापक स्तर पर नारी के प्रति संवेदनशील माहौल बनाने मानसिक परिवर्तन की आवश्यकता है। नारी के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव की पुरजोर वकालत करते हुए प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि इस परिवर्तन में शिक्षा अहम भूमिका निभा सकती है। यह विचार बुधवार को एमडीयू में आयोजित- लैंगिक संवेदीकरण कार्यशाला में व्यक्त किए। इस कार्यशाला का शुभारंभ हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने बतौर मुख्य अतिथि किया। कार्यशाला का आयोजन विवि के कार्यस्थल पर यौन-उत्पीड़न एवं हिंसा रोकथाम एवं जांच समिति ने किया। इसमें विशेषज्ञ-वक्ताओं ने समाज में महिलाओं के प्रति संवेदनशील रवैया रखने तथा एक संवेदी समाज सृजन का संदेश दिया।पंजाब श्विविद्यालय, चंडीगढ़ की प्रोफेसर डाॅ. राजेश गिल ने कहा कि समाज में बढ़ रहे यौन-उत्पीड़न एवं महिलाओं के खिलाफ हिंसा का घेरा तोड़ने के लिए महिलाओं को अपनी चुप्पी तोड़नी होगी गलत कार्यों का विरोध करना होगा। एमडीयू के आईएचटीएम कांफ्रेंस हॉल मेें आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता प्रो. राजेश गिल ने कहा कि यदि यौन-उत्पीड़न के मामले समितियों के समक्ष रिपोर्ट किए जा रहे हैं तो ये सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इन मामलों की शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी है।
लैंगिकसंवेदीकरण समय की जरूरत :इससे पूर्व, एमडीयू के कुलपति प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया ने कहा कि सामाजिक स्तर पर लैंगिक संवेदीकरण समय की जरूरत है। कार्यशाला में बतौर विशिष्ट अतिथि एमडीयू की प्रथम महिला प्रोफेसर डाॅ. वंदना पूनिया ने कहा कि सामाजिक बदलाव लाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। प्रो. रेणु चुघ ने कहा कि समिति विश्वविद्यालय में लैंगिक संवेदीकरण का माहौल सृजित कर रही है। कार्यशाला में डीएसपी पुष्पा खत्री ने विभिन्न महिला कानूनों बारे जानकारी दी। कार्यशाला में आभार प्रदर्शन महिला अध्ययन केन्द्र की अध्यक्षा प्रो. पुष्पा दहिया ने किया। मंच संचालन ज्योति बधवार ने किया।
येरहे मौजूद
इसअवसर पर प्रो. सुनीता मल्होत्रा, प्रो. राजेश धनखड़, प्रो. अंजना गर्ग, प्रो. जे.एस. नांदल, प्रो. गुलशन तनेजा, डाॅ. बीएस सिन्धु, प्रो. सत्यवान बरोदा, प्रो. बीएस गुलिया, डाॅ. अश्विनी धींगड़ा, संबद्ध महाविद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी मौजूद रहे।
रोहतक. कार्यशालामें उपस्थित प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी।
प्रो. कुलदीप चंद