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10 फरवरी को प्रकाशित खबर

5 वर्ष पहले
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3 साल में 30 फुट पाइप भी नहीं बिछा सके अब ट्रामा सेंटर के खुलने का कर रहे इंतजार

ऑक्सीजनके लिए लंबे समय से तड़प रहे पीजीआई के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। लाला श्यामलाल बिल्डिंग के दूसरे तल पर स्थित इस विभाग के ठीक सामने कार्डियोलॉजी न्यूरो सर्जरी है, जहां गैसपाइप लाइन भी है और ऑक्सीजन भी मरीजों तक पहुंचती है, लेकिन प्रबंधन बर्न विभाग के लिए 3 वर्ष में 30 फुट दूरी तक भी पाइप की व्यवस्था नहीं कर सका।

तीन वर्ष में इसकी जिम्मेदारी भी तय नहीं की जा सकी। इसका नतीजा यह हुआ कि तीन वर्ष पहले यहां आए दो वेंटिलेटर डिब्बा बंद ही पड़े रहे। आरटीआई से जवाब मांगा गया तो आनन-फानन में इन दो वेंटिलेटरों को शिशु राेग विभाग को दे दिया गया। आगजनी के शिकार मरीजों को जीवन देने के लिए अब वेंटिलेटर चाहिए तो शिशु रोग विभाग के चक्कर काटने पड़ेंगे।

सिलेंडरपर वेंटिलेटर: पहलेपीजीआई में वेंटिलेटर के करीब ऑक्सीजन गैस सिलेंडर लगाया जाता है। कई वर्षों तक डॉक्टरों ने सुविधाएं नहीं मिलने के कारण इस पर काम भी चलाया, लेकिन इसके बाद आईसीयू सहित कई जगह पाइप लाइन की व्यवस्था हो गई। ऐसे में सवाल लाजमी है कि जब तक पाइप लाइन नहीं मिलती, तब तक सिलेंडर से काम क्यों नहीं चला सकते?

बच्चों को सांस देने के आता है काम

डॉक्टरोंके मुताबिक, बच्चों के गले में सांस लेने का रास्ता पतला होता है। इसलिए आगजनी की घटना में घायल बच्चे को वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत ज्यादा महसूस होती है। जबकि इससे ऊपर के आयुवर्ग के मरीजों को कम जरूरत पड़ती है। अगर विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां दो से चार दिन में कोई कोई गंभीर मरीज जरूर पहुंचता है।

सामने से नहीं, ट्रामा से देंगे अॉक्सीजन

बतायाजा रहा है कि वर्ष 2012 में कमेटी की बैठक के दौरान बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आरबी सिंह ने ऑक्सीजन के मुद्दे को उठाते हुए गैस पाइप लाइन की मांग की थी ताकि उनके विभाग में वेंटिलेटर उपलब्ध हो सके, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। ट्रामा सेंटर में ऑक्सीजन देने की बात कहते हुए ही तीन वर्ष निकाल दिए गए। प्रबंधन चाहता तो सामने वाले विभाग से अस्थायी व्यवस्था आसानी से कर सकता था।

फिलहाल समाधान पर विचार नहीं

बर्नविभाग का यह मामला सामने आने के बाद भी फिलहाल समस्या का समाधान दिखाई नहीं दे रहा। चूंकि ट्रामा सेंटर का काम जोरों से चल रहा है। इसलिए यही कहा जा रहा है कि ट्रामा शुरू होने पर ऑक्सीजन की व्यवस्था हो जाएगी। प्रबंधन की ओर से भी तत्काल राहत के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।

पीजीआई में आएंगे

31 वेंटिलेटर

कुलपतिप्रो. ओपी कालरा ने बताया कि इस वर्ष के अंत तक पीजीआई में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। कई प्रस्तावों पर काम तेजी से चल रहा है। फिलहाल वेंटिलेटर की समस्या दूर होगी। इसके लिए 31 वेंटिलेटर कुछ ही वक्त बाद संस्थान में उपलब्ध होंगे। बर्न विभाग में गैस पाइप लाइन का मामला काफी पुराना है। उन्होंने बताया कि पीजीआई के कई वार्डों में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए काम चल रहा है।

एक ही मंजिल पर आमने-सामने दो विभाग एक में ऑक्सीजन तो दूसरे से सौतेला व्यवहार

रोहतक. लालाश्याम लाल बिल्डिंग के कार्डियोलॉजी विभाग में आईसीयू के बाहर गैसपाइप लाइन। इसके पास ही बर्न विभाग में लाइन नहीं है।

ट्रामा सेंटर के शुरू होने के बाद ही समाधान, तब तक सिलेंडरों से चलाओ काम

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