• Hindi News
  • Local
  • Haryana
  • Rohtak
  • दोनों साध्वियों ने की सजा बढ़ाने की मांग, सोमवार को दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई

दोनों साध्वियों ने की सजा बढ़ाने की मांग, सोमवार को दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई

4 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बाबा साइन कराता था हलफनामा- हम अपनी मर्जी से नपुंसक बन रहे हैं

इधर, हनीप्रीत का नया ड्रामा-पापाजी की कमर में दर्द होगा, मुझे उनके पास जाने दो

पंचकूला हिंसा में सस्पेंड डीसीपी अशोक बहाल

सजा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा गुरमीत, कहा-अफवाहों के आधार पर हुआ फैसला, मेरा मेडिकल तक नहीं कराया

सिरसास्थित डेरा सच्चा सौदा मुखी गुरमीत राम रहीम को सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई दस दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई है। इसके साथ ही दोनों पीड़ित साध्वियों की तरफ से भी सजा को बढ़ाकर उम्र कैद में तबदील किए जाने की मांग की गई है। दोनों याचिकाओं पर एक साथ ही सोमवार को जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस सुधीर मित्तल की खंडपीठ सुनवाई करेगी।

याचिका में पंचकूला की विशेष अदालत के 25 अगस्त को दोषी ठहराने और 28 अगस्त को सजा सुनाने के फैसले को खारिज करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया कि सीबीआई की अदालत ने सभी तथ्यों को कंसीडर नहीं किया। महज अफवाहों के आधार पर ही सजा सुना दी गई। अपील में कहा गया कि बाबा का मेडिकल तक नहीं कराया गया। यह जानना भी जरूरी नहीं समझा गया कि बाबा रेप कर भी सकते हैं या नहीं। यही नहीं दो अलग अलग डेरों में अलग अलग समय पर हुए रेप के मामलों को एक साथ कर सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया। इसमें भी पीडि़ता एक साल तक कुछ नहीं बोली। अपने घर वालों को भी कुछ नहीं बताया। यदि बताया तो फिर वे एक साल तक चुप क्यों रहे। ऐसे में आरोप साबित करने में खामियों के बावजूद जज ने पूर्वाग्रह के आधार पर ही सजा सुना दी। दूसरी तरफ साध्वियों की तरफ से 10 साल की सजा को उम्र कैद में तबदील करने की मांग करते हुए कहा गया कि यह मामला भावनाओं से खिलवाड़ का है जहां गुरु ने अपनी अनुयायी से रेप किया। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा सजा देकर एक उदाहरण तय किया जाए।

गुरमीत सिंह ने अपने सबसे करीबी को ही नपुंसक बना दिया था। यह करीबी पंचकूला में दंगे भड़काने के आरोप में पंचकूला पुलिस की रिमांड पर है। उसने जिस कबूलनामे पर दस्तखत किए हैं, उसमें लिखा है-बाबा ने वर्ष 2000 में मुझे नपुंसक बनवाया था। इस बारे में किसी को भी बताने की सख्त हिदायत दी थी। हालांकि मेरे परिवार में पता चल गया और विरोध भी हुआ, लेकिन डेरा प्रमुुख के कारण कोई बोल ही नहीं पाया। कई लोग हैं, जिन्हें नपुंसक बनाया गया था। सभी से एफिडेविट में लिखवाया कि हम ये अपनी मर्जी से कर रहे हैं।

{कोर्ट में कहा था-पुलिस टॉर्चर कर रही है... हनीप्रीतने अपने वकील को बताया था कि पुलिस उसे टॉर्चर कर रही है। उसने कोर्ट में पेशी के दौरान भी यही बात दोहराई थी। इसके चलते पुलिस अफसरों को सफाई देनी पड़ी थी। लेकिन अब एहतियात बरतते हुए पुलिस हनीप्रीत से सख्ती नहीं कर रही है। फरारी के दौरान पंजाब में हनीप्रीत ने कई बार वकीलों से मुलाकात की थी। अब पकड़े जाने के बाद वह रटे रटाए जवाब दे रही है। पुलिस का मानना है कि कभी कभी पकड़े जाने की आशंका उनके मन में थी, तभी वकीलों ने पहले से ही उसे सिखा-पढ़ा दिया।

{वहदर्द से परेशान होंगे, मेरा वहां होना जरूरी है... भास्करको एक अधिकारी ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि हनीप्रीत ने तीन दिनों के दौरान कई बार डॉक्टर्स और महिला पुलिस अधिकारियों से कहा कि उसे डेरा प्रमुख के पास भेज दो। उसने कहा - पापाजी की कमर में दर्द रहता है। वह इस दर्द से परेशान होंगे, इसलिए मेरा वहां होना जरूरी है। एक डॉक्टर ने हनीप्रीत से पूछा भी कि क्या तुम डॉक्टर हो या फिर कोई डिग्री ली हुई है जो बाबा के दर्द होने पर वहां जाने की बात कह रही हो। पुलिस को हनीप्रीत के एक मोबाइल का सुराग मिल गया है। यह मोबाइल अब किसी और के पास रखवाया गया है। पुलिस को उस शख्स की जानकारी है। उससे कॉन्टैक्ट किया जा रहा है।

पंचकूला | पुलिसहनीप्रीत से कुछ उगलवा नहीं पा रही है, ही कोई सख्ती कर पा रही है। क्योंकि हनीप्रीत ने कोर्ट में कहा है कि पुलिस टॉर्चर कर रही है। उसने पुलिस से कहा है कि वो अपने पापा के पास जाना चाहती है, क्योंकि उनकी तबीयत खराब होगी। पंचकूला पुलिस की टीम शनिवार को हनीप्रीत को लेकर हरियाणा के कुछ जिलों में गई। तीन जगहों पर पुलिस ने चेकिंग की, लेकिन खाली हाथ ही लौटना पड़ा है। रोहतक और फतेहाबाद के पास उन जगहों को खंगालना भी मकसद था जहां वो सिरसा के बाद रुकी थी।

राजधानी हरियाणा | पंचकूलाहिंसा मामले में सस्पेंड चल रहे तत्कालीन डीसीपी अशोक कुमार को राज्य की भाजपा सरकार ने डेढ़ महीने में ही बहाल कर दिया है। अब उन्हें अंबाला में बटालियन एक का कमांडेंट लगाया गया है। सूत्रों के मुताबिक तत्कालीन डीसीपी अशोक कुमार को सस्पेंड करने के कुछ दिन बाद ही सरकार पर उनकी बहाली का दबाव आने लगा था। उनकी बहाली के लिए सीएमओ में बैठे कुछ अफसर और ओएसडी ही पैरवी कर रहे थे। उनकी ओऱ से तर्क दिया जा रहा था कि तत्कालीन डीसीपी अशोक कुमार को गलत सस्पेंड कर दिया गया है। उन्हें बहाल किया जाना चाहिए। हिंसा के मामले में सरकार को हाईकोर्ट की फटकार भी खानी पड़ी थी।

बहालीके साथ थमाई चार्जशीट

तत्कालीनडीसीपी अशोक कुमार को सरकार ने सेवा में बहाली के साथ ही चार्जशीट भी थमा दी है। इसमें उन पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शुरुआती उपायों की पहली सीढ़ी धारा 144 का आदेश भी ठीक से जारी नहीं करने का आरोप है। इधर, सूत्रों का कहना है कि अशोक कुमार को चार्जशीट भी महज औपचारिकता है, जवाब लेने के बाद इसे भी ड्रॉप कर दिया जाएगा। इसकी वजह यह है कि धारा 144 के संबंध में अशोक कुमार के जैसे ही आदेश अन्य प्रभावित जिलों में भी वहां के अधिकारियों ने जारी कर रखे हैं।

शीश महल से सलाखों तक...

खबरें और भी हैं...