दिल्ली की एजेंसी सप्लाई कर रही बाल मजदूर
दिल्लीकी प्लेसमेंट एजेंसियां प्रदेश में बाल मजदूरों की सप्लाई कर रही है, वह भी बेरोक-टोक। सप्ताहभर पहले ही झारखंड के बच्चों से बाल मजदूरी करवाने के खुलासे के बाद अब रोहतक में आसाम का भी एक बाल मजदूर मिला है, जिसे बेगारी करवाने के लिए शहर के शक्ति नगर में दिल्ली की प्लेसमेंट एजेंसी द्वारा 20 हजार रुपए में बेचा गया था। मौका मिलते ही घर से भागे बच्चे ने सिविल लाइन थाना में इसकी सूचना दी। जिसे चौ. लखीराम अनाथालय भेजा गया।
अब मंगलवार देर शाम सिविल लाइन थाना पुलिस और बाल कल्याण समिति की ओर से आसाम से आए उसके भाई रमेशभद्र के हवाले कर दिया गया है। वहीं पुलिस ने दिल्ली की प्लेसमेंट एजेंसी और शक्ति नगर के एक निवासी के खिलाफ बच्चे के भाई रमेशभद्र की शिकायत दर्ज की है। इससे पहले भी शहर के प्रतिष्ठित व्यक्तियों के घरों में बाल मजदूर मिल चुके हैं, लेकिन दिल्ली तक ठोस कार्रवाई नहीं होने के चलते बाल मजदूरों की सप्लाई बंद नहीं हो रही है। बाल सरंक्षण समिति की सदस्य उमा नीलम ने बताया कि शहर से बाल मजदूरी को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गलचुकी हैं अंगुलियां : अासाममूल के 12 वर्षीय बच्चे ने बताया कि उसके पिता नहीं है और मां बीमार रहती है। उसे आसाम के गांव डेकिया जूली से एक व्यक्ति जून 2015 में बहलाकर दिल्ली लाया था और वहां पर एक आशा प्लेसमेंट एजेंसी के हवाले कर दिया। इसके बाद उसे प्लेसमेंट एजेंसी के संचालक राजू चौधरी ने उरोहतक के शक्ति नगर के एक निवासी के हवाले कर दिया और 20 हजार रुपए की रकम भी ली। बच्चे ने बताया कि यहां वह घर के सारे काम करता। काम के चलते पानी में उसकी अंगुलियां भी गल चुकी हैं। प्रताड़ना से तंग आकर वह भागकर सिविल लाइन थाना पहुंचा।
^बाल मजदूरी के मामले में दिल्ली की एक प्लेसमेंट एजेंसी का भी नाम सामने आया है। उसके खिलाफ भी जानकारी जुटाई जा रही है। यह बच्चा शक्ति नगर निवासी के घर काम कर रहा था। शारीरिक प्रताड़ना की भी शिकायत मिली है। -एएसआई पंकज, सिविल लाइन थाना, रोहतक।
पहले भी सामने चुके हैं मामले
घरमें काम करवाने या मजदूरी करवाने के लिए इससे पहले भी बाल मजदूरी के मामले सामने चुके हैं। एक सप्ताह पहले ही झारखंड से बच्चों की तस्करी कर लाए गए 5 बच्चों को झारखंड पुलिस हरियाणा से बरामद कर वापस अपने राज्य में लेकर गई थी। इससे पहले एमडीयू और सेक्टर में भी ऐसे मामले चुके हैं।
महज 1300 रुपए महीना वह भी नहीं मिले अभी तक
बच्चेने कहा कि हर महीने उसे 13 सौ रुपए महीना मानदेय देने की बात कही थी, लेकिन 8 महीने से उसे कोई पैसा भी नहीं दिया गया।
रोहतक. बालकल्याण समिति कार्यालय में नाबालिग बच्चे को उसके परिजनों को सौंपती सदस्य।