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हड़ताल पर डटे निजी एंबुलेंस चालक

5 वर्ष पहले
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निजीएंबुलेंस संचालकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। इसका व्यापक असर सिविल अस्पताल से लेकर पीजीआई तक में देखने को मिला। हालांकि ज्यादातर मरीज सरकारी एंबुलेंस निजी वाहनों से आना-जाना किया।

वहीं हड़ताल खत्म कराने के लिए मंगलवार को भी कोई पहल सरकार प्रशासन की ओर से नहीं की गई। हड़ताली एंबुलेंस चालकों ने मंगलवार को भी जुलूस निकाल सरकार द्वारा लगाए जा रहे टैक्स को गलत बताया। प्रदेश में 8 हजार और रोहतक में करीब 150 प्राइवेट एंबुलेंस चलती है। बड़े अस्पतालों के तो अपने एंबुलेंस हैं, लेकिन आम वर्ग के लिए प्राइवेट एंबुलेंस ही लाइफ लाइन बनती हैं, जिनके नहीं चलने से लोग परेशान हो रहे हैं।

यह है पूरा प्रकरण

प्रदेशसरकार ने निजी एंबुलेंस पर नवंबर में रजिस्ट्रेशन-फिटनेस टैक्स और पीजीटी टैक्स 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दिया। सरकार पीजीटी टैक्स 2011 से मांग रही है, जिससे एंबुलेंस संचालक देने को तैयार नहीं हैं। मरीज की मौत हो जाती है तो डेड बॉडी को ले जाने के लिए ज्यादातर प्राइवेट एंबुलेंस का प्रयोग किया जाता है। ऐसे में हड़ताल ने लोगों को परेशानी में डाल रखा है।

रोहतक. पीजीआईके एंबुलेंस संचालक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल के दौरान नारेबाजी करते हुए।

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