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10 फरवरी को प्रकाशित खबर।

5 वर्ष पहले
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डॉक्टर की जगह इंटर्न भरते हैं जांच पर्ची, 600 फार्म मिले लावारिस

प्रदेशके सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान पीजीआईएमएस में विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। दो दिन से ऑक्सीजन की कमी को लेकर सुर्खियों में आए बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग में औचक छापेमारी से दो वरिष्ठ अधिकारी आमने-सामने गए हैं। बर्न विभाग मरीजों के आधे-अधूरे इन्वेस्टिगेशन फॉर्म को लेकर कटघरे में खड़ा हो गया है। विभाग की ओपीडी में निरीक्षण के दौरान 600 से ज्यादा ऐसे फॉर्म लावारिस पाए गए हैं, जिन पर बैरर, इंटर्न ओटीए के हस्ताक्षर हैं, जबकि नियमों के तहत इन फॉर्म पर केवल मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर ही हस्ताक्षर कर सकते हैं। इतना ही नहीं, 100 से ज्यादा फॉर्म ऐसे हैं, जिन पर हस्ताक्षर मुहर लगी है, लेकिन मरीज का नाम अंकित है और ही पता। जानकारों की मानें तो अगर ये फॉर्म किसी गलत हाथों में लगते हैं तो वह इनका गलत प्रयोग करके बड़ा खेल कर सकता है। बहरहाल, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभागाध्यक्ष डॉ. बिजेंद्र सिंह ढिल्लों ने इन फॉर्म को कब्जे में लेकर प्रबंधन से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। यह विभाग डॉ. आरबी सिंह है, जो पीजीआई में विभिन्न मामलों की विजिलेंस जांच कर रहे हैं। उन्होंने भी इस औचक छापेमारी के खिलाफ वीसी को पत्र लिखा है।

एककर्मचारी की सच्चाई जानने गए तो हुआ खुलासा

सोमवारको सुबह साढ़े नौ बजे ओपीडी में जहां एक और वेतन मिलने के कारण काउंटरमैन हड़ताल पर थे वहीं, 30 जनवरी को एक कर्मचारी की शिकायत की सच्चाई जानने के लिए हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभागाध्यक्ष डॉ. बिजेंद्र ढिल्लो ने औचक निरीक्षण किया। इस बीच दूसरी मंजिल स्थित बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग की ओपीडी पहुंचे डॉ. ढिल्लो ने जांच की तो एक्सरे के खाली फॉर्म, रिपोर्ट्स के साथ इन्वेस्टिगेशन फॉर्म, खाली हस्ताक्षर मुहर लगी इन्वेस्टिगेशन स्लिप बरामद की।

येमिले थे फॉर्म : निरीक्षणके दौरान डॉ. ढिल्लो को 350 एक्सरे, रिपोर्ट के साथ 25 एक्सरे इन्वेस्टिगेशन फॉर्म रिपोर्ट 150 इन्वेस्टिगेश स्लिप, 40 इन्वेस्टिगेशन स्लिप ब्लड रिपोर्ट के साथ बरामद मिली हैं।

डॉक्टरोंके पास नहीं समय, पीजी ही भरते हैं फार्म : पीजीआईकी चौधरी रणबीर सिंह ओपीडी में हर जगह एक ही जैसे हालात हैं। अमूमन सभी विभागों की ओपीडी में इंटर्न या पीजी ही इन्वेस्टिगेशन फॉर्म भरते दिखाई देते हैं। इस मामले में बड़ी शिकायत के बाद प्रबंधन के आगे पीजी को इस काम से हटाने की बड़ी चुनौती होगी। ओपीडी में मरीजों की भारी संख्या और डॉक्टरों की कमी को देखते हुए नई व्यवस्था को लागू करना मुश्किल है। जानकारों की मानें तो अधिकांश डॉक्टरों के पास ओपीडी 100 से 150 मरीजों की होती है। ऐसे में एक या दो डॉक्टर मरीज को देखने, दवाएं लिखने, जांच पर्ची भरने और रिपोर्ट देखने जैसे सभी काम नहीं कर सकते। ऐसे में उन्हें जूनियर्स या अन्य कर्मचारियों की मदद लेनी पड़ती है।

कर्मचारियों से करवा रहे हस्ताक्षर

बतायाजा रहा है कि गुरुवार को ओपीडी में इस छापेमारी को लेकर शिकायत तैयार की जा रही थी। इसकी शिकायत लेकर एक कर्मचारी डॉ. बिजेंद्र सिंह ढिल्लो के पास पहुंचा। डॉ. ढिल्लो निरीक्षण से संबंधित सभी कागजात और उक्त कर्मचारी को लेकर एमएस डॉ. चौहान के कार्यालय पहुंच गए। यहां डॉ. ढिल्लो ने पूरा मामला समझाते हुए जल्द से जल्द फैसला लेने की मांग की।

देरशामतैयार किया दूसरा गया पत्र

गुरुवारदेरशाम डॉ. ढिल्लो ने वर्ष 2015 के 500 ऐसे फॉर्म को लेकर रिपोर्ट तैयार की है, जिनमें हस्ताक्षर, मुहर सहित कई अनियमिताएं पाईं गईं हैं। यह पत्र निदेशक कुलपति कार्यालय को भेजा गया है। बताया जा रहा है कि ये फॉर्म डॉ. ढिल्लो को किसी कर्मचारी ने सुपुर्द किए हैं। आरोप है कि इस कर्मचारी को दो दिन से धमकियां मिल रहीं हैं।

निरीक्षण पर उठाए सवाल, कुलपति को लिखा पत्र

एचओडीडॉ. बिजेंद्र सिंह ढिल्लो की कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आरबी सिंह ने कुलपति प्रो. ओपी कालरा को पत्र लिखा है। 10 फरवरी को लिखे इस पत्र में डॉ. सिंह ने इस कार्रवाई को पुराने मामले से जोड़ते हुए बताया है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2009 में बर्थ सर्टिफिकेट को लेकर डॉ. ढिल्लो के विभाग में विजिलेंस जांच हुई थी। उस वक्त टीम में डॉ. सिंह भी शामिल थे। हालांकि उस मामले में जांच का निष्कर्ष अब तक सामने नहीं आया है।

प्रबंधन की चुप्पी एमएस पर टला फैसला

बतायाजा रहा है कि इस मामले में प्रबंधन के शीर्ष अधिकारियों ने फिलहाल चुप्पी साधी है। निदेशक कार्यालय से डॉ. बिजेंद्र सिंह ढिल्लो का पत्र चिकित्सा अधीक्षक को भेजा गया है। अब इस मामले में अग्रिम निर्णय एमएस डॉ. अशोक चौहान को लेना है। उधर, कुलपति प्रो. ओपी कालरा ने ऐसा कोई पत्र मिलने से इनकार किया है।

ओपीडी में जलाते हैं हीटर

बनती है चाय

नियमोंके खिलाफ जाकर ओपीडी में हीटर चलाया जाता है। चाय भी बनाई जाती है, जबकि सुरक्षा की दृष्टि से यह गलत है। डॉ. ढिल्लो ने निरीक्षण के वक्त पाया कि हीटर की वजह से पीले रंग का डस्टबिन जला हुआ था। यहीं नहीं, सोमवार को ओपीडी पीओडी की थी, लेकिन महिला ओटीए कर्मचारी बीपीएस के इन्वेस्टिगेशन फॉर्म अपनी टेबल पर रखे हुए थी।

{छापेमारी में हस्ताक्षर और मुहर लगे 100 फार्म मिले खाली {अपराधी इन खाली फार्मों की मदद से कर सकते हैं बड़ा खेल

{दोनों ने वीसी को भेजी शिकायत {पीजीआई में गरमाई अंदरुनी राजनीति

रोहतक. बर्नएंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग की ओपीडी में मिले फॉर्म पर हस्ताक्षर मुहर लगी हुई है। इस पर हस्ताक्षर की जगह केवल गोला बनाया गया है।

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