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मजदूर की बेटी का कमाल, बुखार में खेलकर लगाई हैट्रिक

5 वर्ष पहले
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रोहतकके राजीव गांधी खेल स्टेडियम में मंगलवार को बेटियों के जज्बे, हौसले, जुनून और जिद की एक नई कहानी देखने काे मिली। मजदूर मां-बाप की सोनीपत निवासी 13 वर्षीय बेटी मंजू चौरासिया ने सबजूनियर नेशनल चैंपियनशिप में आंध्रप्रदेश की टीम पर एक साथ तीन गोल दागकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

इस होनहार बेटी ने यह कारनामा तब अंजाम दिया, जब वह बुखार से तप रही थी। दो दिन पहले तो उसके पास इलाज करवाने की पैसे तक नहीं थे। अपनी कोच की मदद से उठने लायक हुई तो हैट्रिक मारकर उसने वह कर दिखाया जो हर हॉकी खिलाड़ी का सपना होता है। मंजू ने कहा कि मेरे पास हॉकी की महंगी किट खरीदने के पैसे भले हो, लेकिन जिद है कि मैं सीनियर नेशनल टीम में जरूर खेलूंगी। हॉकी में चमक रही इस होनहार खिलाड़ी की कहानी उसकी ही जुबानी...

15 सितंबर 2010। टीवी पर चक दे इंडिया फिल्म देखते-देखते मन में हॉकी थामने का ख्याल आया। यह ख्याल धीरे-धीरे सपना बन गया। जुनून इस कदर था कि सोते में भी मैं अचानक से बड़बड़ाने लगती, लेकिन मजूदर परिवार की बेटी के लिए सपना देखना भी आसान नहीं होता। अपनी मां को दूसरों के घरों में बर्तन साफ करते और पिता को फैक्टरी में टायर बनाते देखती तो अपनी इच्छाओं को वहीं दबता हुआ महसूस करती। लकड़ी की हॉकी से ही बॉल को इधर-उधर मारकर खुशी हो जाती। मेरी मां को जब मेरी इस इच्छा का पता चला तो वह अपने काम वाले हर घर में हॉकी के बारे में पूछती। ऐसे में एक दिन कोच प्रीतम सिवाच का नाम सुनने को मिला। प्रीतम मैडम से जाकर मिली तो उन्होंने मुझे हॉकी सिखाने की हामी भरी।

अब बात हॉकी किट की अड़ गई। बिहार के गोपालगंज के मूल निवासी पिता वकील भगत और मां मुनावती देवी दोनों की मजूदरी हाड़तोड़ मेहनत के बाद इतनी नहीं थी। कोच ने ही मेरी मदद की और 2014 में मुझे सबजूनियर नेशनल चैंपियनशिप के लिए रांची जाने का मौका मिला। यहां मेरा प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा। अब मैंने इसे सुधारने की जिद पकड़ी। सोनीपत आकर चार-चार घंटे की प्रैक्टिस करने के बाद रोहतक में हैट्रिक लगाना सपना सच होने जैसा लग रहा है।

देश को गोल्ड, मां को खुशी देना मकसद

मंजूने कहा कि अपने मां-पिता को रात-दिन मजदूरी करता देख मुझे बहुत बुरा लगता है। मैं हमेशा अपनी मां को देखते-देखते रोती हूं। वे भी कभी-कभार मुझे गले लगाकर काफी रोती हैं। अब मेरा बस यही सपना है कि मैं इंडियन टीम में शामिल होकर देश को सोना दिलाऊं। साथ ही अपने माता-पिता के आंसू पोछ सकूं। मंजू की टीम को स्टेट में गोल्ड, स्कूल नेशनल सबजूनियर नेशनल 2014 में चौथा स्थान मिला है। मंजू पायका में दो साल से चैंपियन है।

टीम की संकटमोचक है मंजू : कोच

^सोनीपतमें मेरे पास कई बच्चियां गरीब परिवार से हैं। इनके माता-पिता मजदूरी करके घर चला रहे हैं। हॉकी को लेकर बच्चियों में गजब का उत्साह है। मंजू चौरसिया भी इन्हीं में से एक है। रविवार को मंजू रोहतक में बुखार से तप रही थी। उसे आसपास अस्पताल ले जाने के लिए रुपए तक नहीं थे। फिर मैं रात को वहां पहुंची और उसका उपचार कराया। मंजू को उसकी काबिलियत की वजह से टीम की संकटमोचक भी बुलाया जाता है। -प्रीतमसिवाच, कोच, हरियाणा टीम

चंडीगढ़ ने दिल्ली को किया साफ

चंडीगढ़और दिल्ली के बीच मैच रोमांचक रहा। चंडीगढ़ ने 7-4 से मुकाबला जीता। झारखंड उत्तरप्रदेश के मुकाबले में खिलाड़ी दीपिका सिरदर्द बनी रहीं। दीपिका ने उत्तरप्रदेश के खिलाफ 4 गोल दागे। इसके फलस्वरूप झारखंड 7-2 गोल के साथ विजेता घोषित हुआ। साई छत्तीसगढ़ टीम के बीच मुकाबला हुआ। साई टीम ने 11-0 अंकों के साथ जीत हासिल की। इस जीत में कप्तान मोनिका सिंह ने चार और एफ लालावम्पूई ने तीन गोल दागे।

रोहतक| राजीव गांधी खेल स्टेडियम में 6वीं हॉकी इंडियन सबजूनियर नेशनल वुमेन चैंपियनशिप के दूसरे दिन मंगलवार को हरियाणा की जबरदस्त जीत देखने को मिली। हरियाणा आंध्रप्रदेश के बीच शुरुआती मुकाबला मंजू चौरसिया की शानदार हैट्रिक की बदौलत हरियाणा ने 7-0 से जीता। बता दें कि हॉकी इंडिया की इस चैंपियनशिप में 16 से भी ज्यादा राज्यों की टीमें सहभागिता कर रहीं हैं। 14 फरवरी को इसका अंतिम मुकाबला खेला जाना है। अगले सभी मैच गुरुवार सुबह 7 बजे से शुरू होंगे।

चक दे इंडिया देखकर हॉकी पकड़ने की ठानी, अब सीनियर टीम में जगह बनाने को बेताब

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