चार अफसरों की कमेटी ने बदले नियम, राजनीति में फंसी जांच
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रोहतक | पीजीआईमें फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाले कर्मचारी को बर्खास्त करने के मामले में कई अधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विजिलेंस जांच में रिटायर्ड अधीक्षक पर सीधी भर्ती के लिए जिन नियमों को बदलने के आरोप लगे हैं, उन नियमों पर अंतिम मुहर वर्ष 2011 में ईसी की बैठक में लगाई गई। यह प्रस्ताव 4 सदस्यीय कमेटी से होकर आया था। सीधी भर्ती नियुक्तियां नियम के आधार पर नहीं की। सहायक सुपरवाइजर के पद पर 500 से ज्यादा बैरर नर्सों को अयोग्य करार दिया गया, जबकि नियमों के तहत वे योग्य थीं। इस वजह से केवल छह आवेदन आए, जिसकी जांच रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब की मांग की है। मामले में प्रबंधन चुप हैं। अब एक कर्मचारी को बर्खास्त करने के बाद दूसरों पर कार्रवाई राजनीतिक गलियारों में फंसी हुई है।
अधीक्षक के बेटे को नौकरी
दिलाने को बदले नियम
जांचमें सीएसएसडी ब्रांच में सहायक सुपरवाइजर अमरेंद्र नांदल की छत्तीसगढ़ से की गई डिग्री फर्जी पाई गई, रिपोर्ट के आधार पर प्रबंधन ने अमरेंद्र नांदल को बर्खास्त कर दिया, जबकि रिटायर्ड अधीक्षक की पेंशन रोक दी गई है। फिलहाल किसी पर केस दर्ज नहीं हुआ है। इधर, मामले में रिटायर्ड अधीक्षक ने कहा कि उनके बेटे ने एमडीयू से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसी डिग्री के आधार पर नौकरी दी गई। ये नियम 4 सदस्यीय कमेटी के बाद ईसी की बैठक में पास हुए थे। आरोप बेबुनियाद होने के बाद प्रबंधन ने उनकी पेंशन को रोक रखा है।