रोहतक। पीजीआईएमएस रोहतक में पांच साल पहले हुई सीधी भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आया है। कथित रूप से राजनीतिक दबाव के चलते चहेतों को नौकरी देने के लिए नियम बदले गए और नियुक्ति दे दी गई। वो भी जाली दस्तावेजों के आधार पर। विजिलेंस जांच के बाद बुधवार को एक कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया गया है। एक सेवानिवृत्त अधीक्षक और उसके कर्मचारी बेटे के खिलाफ जांच हो रही है। कार्रवाई की जाएगी।
2011 में पीजीआई में दो पदों पर नियुक्ति के लिए सीधी भर्ती के लिए अावेदन मांगे गए थे। कुल छह आवेदन आए थे। इनमें से चार को फोन करके अयोग्य करार दे दिया गया। दो युवकों में एक को सीएसएसडी ब्रांच, दूसरे को एमई ब्रांच में नौकरी दे गई। फेल होने वाले अावेदकों में से एक ने आरटीआई के जरिए चयनित युवकों के दस्तावेज हासिल किए।
छत्तीसगढ़ की यूनिवर्सिटी की डिग्री फर्जी पाई गई। फिर उसने 2013 में विजिलेंस में इसकी शिकायत दे दी। जांच शुरू होने पर पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया। इसके बाद सीएसएसडी ब्रांच में सहायक सुपरवाइजर के पद पर तैनात अमरेंद्र नांदल को बर्खास्त कर दिया गया है। रिटायर्ड सुप्रिटेंडेंट और उनके कर्मचारी बेटे के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है। विजिलेंस रिपोर्ट में उस समय भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों से भी जवाब-तलब करने की सिफारिश की गई है।
फेल होने वाले आवेदक की शिकायत पर हुआ खुलासा, विजिलेंस जांच के बाद कुलपति ने की कार्रवाई
नियमों के मुताबिक, सेवानिवृत कर्मचारी और उसके बेटे के खिलाफ कार्रवाई का फैसला बाकी है। तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को पीजीआई थाना पुलिस को पत्र भेजा जाएगा। विजिलेंस जांच में सीएसएसडी ब्रांच के सहायक सुपरवाइजर अमरेंद्र नांदल के दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। इसके आधार पर उसे बर्खास्त कर दिया गया है। -प्रो. ओपी कालरा, कुलपति, हेल्थ विवि
सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस जांच पूरी होने के बाद मार्च 2015 में रिपोर्ट प्रबंधन को सौंप दी गई थी। तब नांदल को सस्पेंड कर दिया गया।
जांच रिपोर्ट पर कुलसचिव कानून अधिकारी नांदल को बर्खास्त कर मुकदमा दर्ज कराने की सहमति दर्ज हुई थी, लेकिन राजनीतिक दवाब के चलते उस समय आला-अफसरों ने ऐसा नहीं किया गया। इस कारण नांदल को 11 महीनों से आंशिक वेतन मिलता रहा। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में कुछ अधिकारियों से जवाब-तलब करने की अपील भी की गई है।
फर्जीवाड़े के आरोपी कर्मचारियों ने छत्तीसगढ़ की एक यूनिवर्सिटी से बीएससी इन ऑपरेशन टेक्नोलॉजी की डिग्री जमा करवाई थी। विजिलेंस जांच में वहां के विवि प्रबंधन ने कहा कि उनके यहां ऐसा कोई कोर्स नहीं होता और ही इन लोगों ने यहां से कोई डिग्री की है। वहीं, सहायक सुपरवाइजर के लिए पीजीआई के बैरर, नर्स और असिस्टेंट भी अप्लाई कर सकते थे, लेकिन नियमों को बदलकर इन्हें वंचित कर दिया गया। इस वजह से केवल छह ही आवेदन आए। इनमें से भी चार को अयोग्य ठहराकर दोनोें अपने चहेतों को लगा दिया गया।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, जिन दो युवकों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी दी गई, उनमें से एक का पिता चयन कमेटी में सदस्य रहे। जांच में पाया गया है कि अपने बेटे को नौकरी दिलाने के चक्कर में उक्त अधीक्षक ने संस्थान के नियमों से भी छेड़छाड़ की है। खुलासा होने पर प्रबंधन ने कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन रोक दी है।