रोहतक। पूर्व मुख्यमंत्री मास्टर हुकुम सिंह की पीजीआई में इलाज के दौरान मौत होने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। पूर्व सीएम के इलाज व प्रोटोकॉल में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की मांग उठी है। एक शिकायत के आधार पर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने पंडित बीडी शर्मा हेल्थ विवि के कुलपति प्रो. ओपी कालरा से जवाब मांगा है। 9 फरवरी को जारी पत्र में साफ लिखा है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा मुहर लगाए जाने के बाद चार्जशीट डॉक्टरों के खिलाफ पिछले 10 माह से अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उधर, कुलपति प्रो. कालरा ने रजिस्ट्रार डॉ. सरला हुड्डा को जल्द ईसी बैठक बुलाने का आदेश दिया है ताकि नियमों के तहत विवि की कार्यकारी परिषद के सामने इस मामले को रखा जाए। बताया जा रहा है कि पत्र का जवाब अभी तक चंडीगढ़ नहीं भेजा गया है।
बता दें कि 25 फरवरी 2015 को पीजीआई में उपचाराधीन पूर्व मुख्यमंत्री हुकुम सिंह की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें गुड़गांव के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 26 फरवरी को पूर्व सीएम ने दम तोड़ा। इसी बीच परिजनों ने पीजीआई प्रबंधन पर इलाज और प्रोटोकॉल में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया सरकार से कार्रवाई की मांग की। दो माह तक प्रदेश की सुर्खियों में रहने वाले इस मामले में 28 अप्रैल 2015 को दो डॉक्टरों को चार्जशीट किया।
सरकार ने 3 बार कराई थी जांच : स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने पहले इस मामले की जांच पीजीआई प्रशासन को दी। रिपोर्ट से असंतुष्ट मंत्री विज ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी को जांच का जिम्मा सौंपा। कासनी ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी, जिसमें पीजीआई के अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। बाद में मुख्यमंत्री ने कासनी की रिपोर्ट को खारिज करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव आरपी चंद्र को जांच का जिम्मा सौंपा था।
नौकरी में फर्जीवाड़े से जोड़ रहे मामला
दो दिन पहले फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी पाने वाले कर्मचारी को बर्खास्त करने और रिटायर्ड अधीक्षक की पेंशन रोकने की कार्रवाई के अगले ही दिन मास्टर हुकुम सिंह का मामला फिर से गरमा उठा है। बताया जा रहा है कि संस्थान में पिछले एक सप्ताह के भीतर जितने भी मामले सामने आए हैं, वे सभी एक-दूसरे से जोड़े हैं। सूत्रों की मानें तो एक बार फिर पीजीआई राजनीतिक गलियारों में खड़ा है।