रोहतक. जन स्वास्थ्य विभाग के ठेकेदार तरुण गुप्ता व निगम पार्षदों के बीच की लड़ाई में बड़ा खुलासा हुआ है। पार्षद एक तरफ जहां ठेकेदार को हटाने के लिए शोर मचा रहे हैं, दूसरी तरफ 9 पार्षदों ने खुद ठेकेदार को लिखित में संतुष्टि प्रमाण पत्र (काम से खुश होने का पत्र) दे रखा है। हालांकि प्रमाण पत्र को लेकर पार्षदों के अपने-अपने तर्क हैं और यह पत्र दिसंबर में ठेकेदार को दिए गए हैं। पत्र उजागर होने से पार्षद बैकफुट पर आ गए हैं।
सवाल है कि क्या एक माह के अंदर ठेकेदार का काम इतना खराब हो गया कि उसे हटाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन, हंगामा और विधानसभा तक शिकायत की जाने लगी? क्या पार्षद मात्र जनता को दिखाने के लिए शोर मचा रहे हैं? पार्षदों ने दिसंबर में ठेकेदार को संतुष्टि प्रमाण पत्र दिया है। जबकि उन्होंने इसी माह डीसी व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
जरूरी नहीं, फिर दे रहे संतुष्टि पत्र
नियमों के तहत पार्षद द्वारा ठेकेदार को संतुष्टि प्रमाण पत्र देना अनिवार्य नहीं है। इसके बावजूद 20 में से 8 पार्षदों ने लिखकर दिया है। ठेकेदार अधिकारियों के सामने अपना मजबूती से पक्ष रखने के लिए प्रमाण पत्र ले रहा है, ताकि भुगतान के समय कोई परेशानी न आए। अधिकारियों की उपेक्षा व सीवर ठेकेदार की कथित मनमानी से परेशान नगर निगम के पार्षद गुरुवार को सांसद दीपेंद्र हुड्डा से नहीं मिल सके। अब डीसी एवं निगम आयुक्त डा. अमित अग्रवाल के सामने शुक्रवार को पार्षद दर्द बयां करेंगे। शुक्रवार को एमडीयू के टैगोर ऑडिटोरियम में पार्षद सांसद से नहीं मिल सके।
..और भी पार्षद संतुष्टि पत्र देने के लिए तैयार
ठेकेदार तरुण गुप्ता का कहना है कि इनके अलावा और भी चार से पांच पार्षद संतुष्टि प्रमाण पत्र देने के लिए तैयार हैं। इसके लिए तीन से चार दिन का समय मांगा गया है। अब भी जन स्वास्थ्य विभाग उसके कार्य से संतुष्ट नहीं है तो वह अपना ठेका रद्द कराने के लिए तैयार है।
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