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अब पीजी में साइंस के साथ पढ़ सकेंगे आर्ट विषय के सब्जेट विषय भी

6 वर्ष पहले
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रोहतक। एमडीयू में उच्च शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के तहत महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं। आगामी सत्र 2015-16 से छात्र पढ़ाई के बीच में कॉलेज और यूनिवर्सिटी बदल सकेंगे। वहीं छात्र मैथ और साइंस के साथ आर्ट्स के विषय व संस्कृत भी पढ़ सकेंगे। यूजीसी ने आठ जनवरी को सीबीसीएस सिस्टम लागू करने के निर्देश जारी करते हुए इस पर मुहर लगा दी है।
इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने आगामी सत्र से सीबीसीएस लागू करने के निर्देश देशभर की सभी यूनिवर्सिटी को जारी कर दिए हैं। सीबीसीएस के लागू होते ही छात्रों को डिग्री के बीच में कॉलेज और यूनिवर्सिटी बदलने की छूट भी मिलेगी। इसके लागू होने से कॉलेजों पर शिक्षा की गुणवत्ता के स्तर को बरकरार रखने का दबाव होगा। बदलते वक्त के साथ खुद को अन्य से बेहतर बनाना होगा। अन्यथा छात्रों के डिग्री पूरी करने से पहले ही दूसरे कॉलेज में चले जाने का डर रहेगा।

यूं समझें सीबीसीएस को

मान लीजिए किसी छात्र को पत्रकारिता डिग्री करनी है, वह इसके साथ कोई अन्य विषय भी चुन सकेगा। अगर उसकी रुचि किसी विज्ञान विषय में है तो वह साइंस का कोई विषय चुन सकेगा। अगर वह कॉमर्स या राजनीति विज्ञान या लिटरेचर में रुचि रखता है, उस तरह का विषय लेकर अपनी पढ़ाई कर सकेगा। इसी तरह किसी छात्र को एमएससी रसायन शास्त्र में करनी है तो वह अपनी च्वाइस का विषय चुन सकता है।

सीबीसीएस को लेकर बनाई रूपरेखा

एमडीयू के शैक्षणिक विभागों में आगामी शैक्षणिक सत्र में पीजी पाठ्यक्रमों में सीबीसीएस प्रणाली लागू करने के लिए रूपरेखा बनाई जा रही है। शैक्षणिक मामलों की अधिष्ठाता प्रो. सुनीता मल्होत्रा ने बताया कि यूजीसी ने आगामी शैक्षणिक सत्र से देश के प्रत्येक विश्वविद्यालय में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू करने बारे दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसी कड़ी में सीबीसीएस प्रणाली के एमडीयू में क्रियान्वयन पर यह मंथन किया जा रहा है। सैद्धांतिक तौर पर सीबीसीएस प्रणाली को आगामी सत्र से पीजी पाठ्यक्रमों में शुरू कर दिया जाएगा।
ये है सीबीसीएस कार्यक्रम

इस च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के तहत अब परीक्षा में अंक की बजाय ग्रेड दिए जाएंगे। ग्लोबल स्तर पर चलने वाले ग्रेडिंग सिस्टम के तहत अब हर छात्र को कुछ प्वाइंट अर्जित करने होंगे। हर विभाग अपने स्तर पर तय करेगा कि कुल प्वाइंट कितने हों। हर पेपर के अलग-अलग क्रेडिट होंगे। विद्यार्थी अब किसी भी विषय में पीजी के कोर विषय के साथ वैकल्पिक विषय के तौर पर दूसरे अनुशासन के विषय भी चुन सकेंगे। ओपन च्वाइस बेस्ड सिस्टम के तहत किसी भी विषय में एमए/एमकॉम या एमएससी करने वाला छात्र अपनी इच्छानुसार दूसरे अनुशासन का विषय भी पढ़ सकेगा। इस मल्टी डिस्प्लिनरी पढ़ाई से छात्रों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।