सिरसा। एक वर्षीय बीएड (बैचलर ऑफ एजुकेशन) और एमएड (मास्टर ऑफ एजुकेशन) की डिग्री कोर्स की अवधि अगले सत्र से दो साल कर दी है। नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन ने जस्टिस वर्मा कमीशन की समीक्षा रिपोर्ट पर तत्काल प्रभाव से देश के सभी विश्वविद्यालयों को दोनों कोर्स की अवधि बढ़ाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
नए आदेश के अनुसार दो वर्षीय डिग्री कोर्स को छात्र तीन साल में पूरा कर सकते हैं। लेक्चरर की संख्या भी 75 से बढ़ाकर 80 प्रतिशत कर दी गई है। पहले 14 छात्रों पर एक टीचर होता था। अब 25 छात्रों पर एक लेक्चरर होगा। बीएड कॉलेजों में सीटें 100 से घटाकर 50 कर दी गई है। सीटें कम होने से नए कॉलेज में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 2500 वर्ग मीटर की बजाए 1500 वर्ग मीटर की जगह होनी चाहिए।
एकेडमिक स्टाफ भी बढ़ेगा
नए नियम के अनुसार एक प्रिंसिपल, पर्सपेक्टिव इन एजुकेशन 4, पैडागॉजी विषय के आठ, हेल्थ और फिजिकल एक, फाइन आर्ट एक, परफॉर्मिंग आर्ट के टीचर की नियुक्ति होगी। जबकि पहले 100 बच्चों पर सात एकेडमिक स्टाफ होता था। गैर शैक्षणिक स्टाफ में लैब असिस्टेंट की नया पद सृजित किया गया। पहले बीएड कॉलेज के प्रिंसिपल के लिए पांच साल बीएड और पांच साल सेकेंडरी एजुकेशन में टीचिंग का अनुभव अनिवार्य था। अब केवल बीएड कॉलेज में आठ साल का अनुभव होना जरूरी है।
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