रोहतक. प्रदेश की एक मात्र हेल्थ यूनिवर्सिटी के परीक्षा प्रबंधन में एक और बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। दो दिन पहले बीएएमएस सेकेंड प्रोफ के द्रव्यगुण विज्ञान (द्वितीय पेपर) की रि-अपीयर परीक्षा में छात्रों को वार्षिक परीक्षा का पेपर थमा देने का मामला सामने आया था और अब इसी कड़ी में इसी विषय के प्रथम पेपर की रि-अपीयर परीक्षा में पिछले साल की रि-अपीयर परीक्षा का पेपर बांट देने का खुलासा हुआ है। विवि के परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि शुक्रवार को इस मामले की भी जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि 4 जनवरी को हुई बीएएमएस सेकेंड प्रोफ के द्रव्यगुण विज्ञान (द्वितीय) की रि-अपीयर परीक्षा को रद्द कर दिया गया है और यह पेपर दोबारा अब दोबारा से 13 फरवरी को होगा। परीक्षा नियंत्रक डा. संजय कुमार ने बताया कि कुलपति ने पुराने पेपर के मामले में कमेटी गठित कर दी है। जो ओवर ऑल परीक्षा में हुई प्रक्रिया की जांच करेगी। नए मामले को लेकर पेपर सेटर से बात होगी और रिकॉर्ड दिखवाया जाएगा।
पेपर पर एक नजर
पेपर नंबर दिसंबर 2013/1324, अधिकतम अंक 90, प्रश्नों की संख्या पांच। प्रश्न एक, प्रश्न दो व प्रश्न तीन के तीनों प्रखंड पिछले साल के पेपर की तरह। प्रश्न चार में पुराने साल के पेपर के तीनों बिंदु, जिन पर टिप्पणी लिखनी थी और अंतिम व प्रश्न पांच में भी वहीं तीन बिंदुओं पर टिप्पणी लिखनी है, जो पिछले सत्र के पेपर में आई थीं।
धांधली की तरफ इशारा
हेल्थ विवि की परीक्षाओं में एक के बाद एक सामने आ रही गड़बड़ी धांधली की तरफ इशारा कर रही हैं। पेपर तैयार करने के लिए नियुक्त किए जाने वाले एक्जामिनर से लेकर पेपर सेटर, पेपर छपने वाली प्रेस में कार्यरत कर्मचारी व विवि प्रबंधन तक शक के दायरे में है। विशेषज्ञों का मानना है कि हेल्थ विवि की परीक्षाओं में इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी जिम्मेदारों की मर्जी के बिना नहीं हो सकती। इसमें भी विशेषज्ञों के दो तर्क हैं। पहला कि विवि के अधिकारियों के इशारे पर सब कुछ हुआ और दूसरा तर्क यह कि परीक्षा को लेकर अधिकारियों ने जरा भी गंभीरता नहीं दिखाई।