रोहतक। एमडीयू में 2013 में बीटेक की उत्तरपुस्तिका घोटाले का अभी निपटारा नहीं हो पाया है कि अब एक नया फर्जी उत्तरपुस्तिका का मामला सामने आया है। विवि की गोपनीय शाखा से अधूरी जांची उत्तरपुस्तिका को दोबारा जांच के लिए मूल्यांकनकर्ता के पास भेजने पर खुलासा हुआ कि उत्तरपुस्तिका को पहले ही किसी अन्य मूल्यांकनकर्ता ने जांचा है, जबकि उत्तरपुस्तिका में काफी खामियां मिली हैं।
उधर, परीक्षा नियंत्रक ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कह रहे हैं। हुआ यूं कि 5 दिसंबर 2014 को एमडीयू की गोपनीय शाखा की ओर से भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय (बीपीएसएमवी) के लॉ विभाग के अध्यक्ष डॉ. विमल जोशी को पत्र लिखा गया कि आपके पास मात्र एक लॉ विषय की उत्तरपुस्तिका भेजी जा रही है, जोकि पहले भी आपके ही सेंटर में चेक की गई है। इस उत्तरपुस्तिका में पेज नंबर 25 से 36 तक प्रश्नों के उत्तरों को जांचा ही नहीं गया है। ऐसे में अधूरी जांची उत्तरपुस्तिका को दोबारा से पूरा जांचकर भेजा जाए, ताकि मूल्यांकन से पूरा परीक्षा परिणाम दिया जा सके। इस पर डॉ. जोशी ने उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकनकर्ता लॉ विभाग के ही सहायक प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार को बुलाकर कॉपी दोबारा जांचने के निर्देश दिए। जैसे ही डॉ. पवन कुमार ने उत्तरपुस्तिका के अधूरे जांचे जाने की बात सुनी तो उन्हें हैरानी हुई कि उनकी ओर से कभी किसी उत्तरपुस्तिका को अधूरा जांचा ही नहीं गया। बाद में पूरी उत्तरपुस्तिका को पलटकर देखा तो डॉ. पवन ने पाया कि न तो मूल्यांकनकर्ता के स्थान पर उनके हस्ताक्षर हैं और न हीं उत्तरपुस्तिका पर छात्र के अंगूठे के निशान। ऐसे में उत्तरपुस्तिका असली नहीं लग रही। इसलिए इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की जाए।
कहां से आई उत्तरपुस्तिका नम्बर 43001
गोपनीय शाखा में अधूरी जांची हुई उत्तरपुस्तिका नंबर 43001 के पीछे बड़े घोटाले की भी बू आ रही है। अधूरी जांची उत्तरपुस्तिका और मूल्यांकनकर्ता के इसके फर्जी होने की बात कहने से ही कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि इतने सुरक्षित स्थान पर अधूरी जांची हुई उत्तरपुस्तिका कैसे पहुंची। इस पर रोल नंबर 2426841 दर्शाया गया है और लॉ विभाग के संवैधानिक कानून द्वितीय की परीक्षा का जिक्र है जोकि मई 2014 में एमडीयू से करवाई गई है।
पहले ये कदम उठाए थे
एमडीयू की गोपनीय शाखा से 2012 में विधि विभाग केे एक छात्र की तीन उत्तरपुस्तिका गायब होने के बहुचर्चित मामले के बाद एमडीयू की परीक्षा शाखा ने सुरक्षा कड़ी करने का फैसला उठाया था। अधिकारियों की ओर से हर 10 दिन में दैनिक मजदूरी पर लगे कर्मचारियों को बदलने के आदेश जारी किए गए थे। इसके साथ ही छह महीने से ज्यादा कर्मचारियों को इस शाखा में नहीं रखा जाएगा।
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