रोहतक। राजनीति के इतिहास में देश में पहली बार कांग्रेस सरकार गिराने वालों में शामिल रहे झज्जर के चौधरी चांदराम 92 की उम्र में किंग की जगह किंग मेकर बनने की ज्यादा इच्छा रखते हैं। प्रदेश के चुनावी दंगल में उतरने के लिए चांदराम ने 21 सितंबर को रविदास हॉस्टल में भारतीय समाज शक्ति पार्टी की मीटिंग बुलाई है, जिसके वे संरक्षक हैं। दैनिक भास्कर से पूर्व केंद्रीय मंत्री व प्रदेश के पहले उप मुख्यमंत्री रह चुके चौधरी चांदराम ने सरकार बनाने से लेकर गिराने तक की पुरानी यादें ताजा कीं..
कांग्रेस की पहली सरकार क्यों गिराई
मेरे नहीं, पंडितजी के ग्रह खराब थे
1967 के चुनाव में 46 सीट जीतकर कांग्रेस सत्ता में आई। उस समय देवीलाल, सर छोटूराम के भतीजे श्रीचंद और मैं भी कांग्रेस में था। चंडीगढ़ में शपथ ग्रहण समारोह में पता चला कि पंडित भगवत दयाल शर्मा मुझे कैबिनेट मंत्री नहीं बनाना चाहते। मैं उनके पास पहुंचा और कहा यूं तो राम-लछमण की जोड़ी टूट जाएगी। पंडितजी बोले, चांदराम सब ग्रह दशा व नक्षत्रों का खेल है। मैंने भी जवाब देते देर नहीं लगाई। कहा, पंडितजी अब अपने ग्रह देख देना। 12 दिन बाद जब स्पीकर का चुनाव हुआ, उसमें 17 कांग्रेसियों ने बगावत कर दी। वोटिंग के समय कांग्रेस के विधायक बंसीलाल गैर हाजिर रहे थे। पंडित भगवत दयाल को इस्तीफा देना पड़ा।
उपमुख्यमंत्री पद क्यों छोड़ा
लोटा लेकर कसम खाई थी, इंदिरा ने कहा, छोड़ दिया पद, गिरा दी सरकार
पंडित भगवतदयाल शर्मा के इस्तीफे के बाद राव बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस के 17 विधायकों के सहयोग से सरकार बनाई। मैं प्रदेश का पहला उपमुख्यमंत्री बना। सभी विधायकों ने लोटे में नमक लेकर कसम खाई थी कि कोई भी विधायक पूंजीपति के घर खाना नहीं खाएगा। 249 दिन बाद राव ने यमुनानगर शुगर मिल के मालिक के घर खाना खा लिया। तब इंदिराजी के कहने से मैंने इस्तीफा दे दिया। राव की सरकार भी गिर गई।
अब क्या हालात लगते हैं
भूपेंद्र सिंह हुड्डा न जाटों के और न गैर जाटों के साथ
प्रदेश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल है। अब भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस न तो जाट और न ही गैर जाट की पार्टी रह गई है। मैं प्रदेश को कांग्रेस व भाजपा का विकल्प देना चाहता हूं। इसके लिए भिवानी निवासी राजेंद्र के नेतृत्व में गठित भारतीय समाज शक्ति पार्टी का संरक्षक हूं। अगर पार्टी अगर चुनाव लड़ने के लिए कहेगी तो चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं। मेरी इच्छा किंग नहीं, बल्कि किंग मेकर बनने की है।
छोटूराम से प्रभावित थे
चांदराम झज्जर के गांव खरहर के रहने वाले हैं। उनके पिता जमीन जोतते थे। सर छोटूराम से प्रभावित होकर राजनीति में आए। 1945 में डीएवी काॅलेज लाहौर से अर्थशास्त्र में एमए की। 1952 में झज्जर से एमएलए बने। पीएम गुलजारीलाल नंदा के कार्यकाल में जहाजरानी व परिवहन मंत्री भी रहे। 92 साल के चांदराम पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनके दो बेटे व दो बेटी हैं। एक बेटी इंग्लैंड में बस गई। दूसरी बेटी के पति रिछपाल मेहरा ने 1977 में चुनाव लड़ने के लिए नौकरी से इस्तीफा दिया, लेकिन चांदराम ने चुनाव में उतरने से मना कर दिया।
(फोटो- चांदराम)