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डाउनलोड करेंरोहतक. बहुचर्चित अपना घर प्रकरण के खुलासे को 9 मई को एक साल पूरा हो गया। मामले की जांच कर रही सीबीआई अब जल्द ही पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष कोर्ट में पूरक चार्जशीट दायर करेगी।
मामले की मुख्य अभियुक्त एवं अपना घर की संचालिका जसवंती, बेटी सिम्मी, दामाद जयभगवान, भाई जसवंत, ममेरे भाई सतीश, ममेरी बहन शीला व काउंसलर वीना अभी अम्बाला जेल में बंद हैं, जबकि सेवानिवृत थानेदार भीम सिंह रंगा सहित तीन को जमानत मिली हुई है।
शहर की चिन्योट कॉलोनी स्थित एनजीओ अपना घर में प्रताड़ना से तंग आकर भागी तीन लड़कियों ने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को शिकायत दी कि अपना घर में न केवल यौन शोषण हुआ, बल्कि शारीरिक तौर पर भी प्रताड़ित किया जाता है। एनओसी की टीम ने 9 मई को देर शाम अपना घर पर छापा मारकर जांच पड़ताल की। इससे पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया।
एडीसी आरसी बिधान व एसपी विवेक शर्मा मौके पर पहुंचे। छह घंटे चली जांच-पड़ताल के बाद पुलिस ने अपना घर की संचालिका जसवंती व उसकी बेटी सिम्मी को गिरफ्तार कर लिया। जांच-पड़ताल के बाद मामले में जसवंती के दामाद जयभगवान, भाई जयवंत, ममेरे भाई सतीश, ममेरी बहन शीला व काउंसलर वीना सहित कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
गवाह मुन्नी ने पुलिस को छकाया
अपना घर मामले की अहम गवाह आसाम निवासी मुन्नी ने पुलिस को खूब छकाया। जिला प्रशासन की ओर से उसे गांधी कैंप स्थित हरिओम सेवा दल के सहारा आश्रम में छोड़ा गया। दिसंबर माह में मुन्नी आश्रम से कानपुर निवासी एक युवती के साथ फरार हो गई। प्रकरण की अहम गवाह के गायब होने से जिला प्रशासन को काफी किरकिरी का सामना करना पड़ा।
दो सप्ताह बाद मुन्नी को आसाम से बरामद किया गया। उसके साथ गई लड़की ने मुन्नी पर रिश्तेदार से यौन उत्पीड़न कराने का आरोप लगाया। आसाम पुलिस ने उसे यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। तभी से मुन्नी आसाम में है।
इस प्रकरण में पुलिस की हाईकोर्ट में काफी किरकिरी हुई। वकील उत्सव बैंस ने पुलिस व प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। हाईकोर्ट द्वारा तलब किए जाने के बाद तत्कालीन डीजीपी रंजीव दलाल ने एडीपी एमएस मान की अध्यक्षता में विशेष टीम का गठन किया।
तीन सप्ताह तक एसआईटी ने अपना घर प्रकरण की गहराई से जांच-पड़ताल की। साथ ही सबूत नष्ट करने के आरोप में जांच टीम में शामिल थानेदार भीम सिंह रंगा सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इसके बाद भी पुलिस की जांच पर सवाल उठते रहे। इसके चलते प्रदेश सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की। अगस्त में केस सीबीआई को सौंप दिया गया।
सामाजिक संस्थाओं पर बढ़ाया सरकार ने नियंत्रण: अपना घर प्रकरण से सबक लेते हुए प्रदेश सरकार ने न केवल सामाजिक संस्थाओं पर नियंत्रण बढ़ाया, बल्कि जिला स्तर पर महिला एवं बाल संरक्षण अधिकार कमेटी का गठन किया। डीसी को कमेटी का अध्यक्ष, एसपी, एसडीएम, सीएमओ व सीडीपीओ को सदस्य बनाया गया। इसके अतिरिक्त हर पुलिस थाने में सरंक्षण अधिकारी की नियुक्ति की गई।
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