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डाउनलोड करेंरोहतक. शहर में विकास के नाम पर बिना योजना व दूर दृष्टि के लाखों रुपए बर्बाद हो रहे हैं। इसी के चलते शहर में दिल्ली की तर्ज पर बनाए गए बस क्यू शेल्टर सफेद हाथी बनकर रह गए हैं। करीब 70 लाख रुपए खर्च होने के बावजूद चौक व चौराहे पर छात्र व राहगीर धूप में खड़े होने पर मजबूर हैं। शेल्टर ऐसी जगह बनाए गए हैं, जहां न तो बस रुकती हैं और न ही कोई दूसरा वाहन।
दो साल पहले नगर निगम प्रशासन की ओर से शहर के एक दर्जन चौक व चौराहों पर बस क्यू शेल्टर बनाए गए। एक शेल्टर पर पांच से छह लाख रुपए खर्च हुए। तर्क दिया गया कि शहर में हर रोज तीन से चार हजार छात्र आसपास के गांवों से पढ़ने आते हैं। सुबह व दोपहर उन्हें वाहन पकड़ने के लिए दिल्ली बाईपास, शीला बाईपास, सोनीपत स्टैंड, झज्जर बाईपास, हिसार बाईपास व भिवानी बाईपास व अन्य जगह घंटों धूप व बारिश में खड़ा रहना पड़ता है। साथ ही शहर के आम लोगों की भी यही समस्या है। ऐसे में दिल्ली की तर्ज पर चयनित एक दर्जन चौक व चौराहों पर बस क्यू शेल्टर बनाए गए।
फोटो- झज्जर बाईपास क्यू शेल्टर की बजाय धूप में खड़ीं युवतियां व अन्य यात्री बस का इंतजार करते हुए।
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