भिवानी | बात उन दिनों कि है जब भिवानी में बंसीलाल की तूती बोलती थी। कोई भी नेता उनके या उनके पुत्र सुरेंद्र सिंह के सामने चुनाव लड़ने का हौसला नहीं दिखाता था। दो बार राजस्थान से विधायक रह चुके अजय सिंह चौटाला 1998 में हिसार लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते थे। सुबह-सुबह सिरसा स्थित आवास में जब अजय तैयार होकर अपने दादा चौ. देवीलाल का आशीर्वाद लेने पहुंचे तो उन्होंने पूछा अजय तुम कहां जा रहे हो? अजय ने कहा "दादाजी मैं हिसार लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहता हूं।' इस पर देवीलाल बोले, "सांसद बनना है या नेता।'
इस पर अजय ने कहा, "दादाजी मैं सांसद नहीं, नेता बनना चाहता हूं।' देवीलाल बोले-‘देवीलाल का पौत्र होने के कारण सांसद तो कहीं से भी बन सकते हो, लेकिन नेता बनना चाहते हो तो भिवानी जाओ और बंसीलाल के बेटे सुरेंद्र को उसके ही घर में हराकर आओ। शेर को शेर की मांद में जा कर हराने वाला ही वीर कहलाता है।’
इस पर अजय सिंह ने अपनी गाड़ी का मुंह भिवानी की तरफ मोड़ लिया। हालांकि उस चुनाव में कुछ वोटों से वे चुनाव हार गए, लेकिन अगले ही वर्ष 1999 में सुरेंद्र सिंह को हराकर सांसद बने। भिवानी से सांसद बनने के कारण ही अजय सिंह चौटाला हरियाणा के नेता बन पाए और आज भी पूरे हरियाणा में अजय सिंह के सबसे ज्यादा कार्यकर्ता भिवानी जिले से हैं।