रोहतक. दोनों किडनी फेल होने के बाद इलाज की खातिर 10 दिन पहले पीजीआई में भर्ती कराए गए नेपाली युवक की शुक्रवार को मौत हो गई। मृतक की मुंहबोली बहन
सोनीपत के थाना खुर्द खरखौदा निवासी बंटी ने भाई के इलाज के लिए कई जतन किए, लेकिन सब नाकाम हो गए।
इसके साथ ही बहन को शव देने को लेकर पीजीअाई प्रबंधन ने पहले तो इनकार कर दिया लेकिन शाम होते-होते आखिरकार 12 घंटे की जद्दोजहद के बाद प्रबंधन मान गया और बहन बंटी को शव सौंप दिया।
नहीं मिली दवा तो चली गई जान
मृतक ओमकांत काफ्ले नेपाल निवासी टीकाराम काफ्ले का बेटा है, जिसकी खबर दैनिक भास्कर के 25 सितंबर के अंक में इंसानियत की खातिर गहने बेचकर भी कराऊंगी इलाज शीर्षक से प्रकाशित की गई। इलाज में लगभग 20 हजार रुपए खर्च होने के बाद भी बंटी ने कहा था कि उसकी प्राथमिकता ओमकांत को बचाना था, पैसे की परवाह नहीं की। लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के कारण समय से दवा नहीं मिली तो उसकी हालत और बिगड़ गई। 6 दिन पहले ओमकांत काफ्ले कोमा में चला गया। इस बीच उसकी मौत हो गई।
पहचान पत्र देख भड़के डॉक्टर
दो दिन पहले उसका पासपोर्ट, पहचान पत्र लेकर भांजा पदमराज नेपाल से रोहतक आ गया था। शुक्रवार को डेड बॉडी लेने के लिए जैसे ही पहचान पत्र दिखाया गया, डॉक्टर भड़क गए। बंटी के शब्दों में कहा गया कि मृतक के परिजनों के आने पर ही डेड बॉडी मिल पाएगी। नाम बदलवाने की कोशिश में बंटी, पदमराज और उसके गांव से अाए दो अन्य लोग भटकते रहे। लेकिन अंत में शाम होते-होते प्रबंधन मान गया और शव बहन को देने के लिए राजी हो गया।
शव सौंपने की प्रक्रिया
दुर्घटना में घायल किसी व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत होने पर अस्पताल प्रशासन शव का पोस्टमार्टम कर पुलिस के संज्ञान में शव को ब्लड रिलेशन वाले परिजनों को सौंप देता है। इसके लिए परिजनों का पहचान पत्र, राशन कार्ड और मृतक के इलाज की केस हिस्ट्री होना आवश्यक है। दूसरी ओर यदि किसी की मौत बीमारी से होती है तो मृतक की केस हिस्ट्री जांचकर शव परिजनों के हवाले कर दिया जाता है। विशेष परिस्थिति में यदि परिजन अस्पताल में देरी से आते हैं तो कम से कम तीन दिन तक शव को फ्रीजर में सुरक्षित रखा जाता है। यदि मृतक लावारिस है तो शव को किसी ऐसे संस्थान को सौंप दिया जाता है, जो उसका अंतिम संस्कार कर सके।
पीजीआई में नेपाली युवक अोम कान्ता काफ्ले का शव लेने के लिए परिजन भटकते हुए ।