रोहतक। रोहतक शहर से सात बार विधायक व प्रदेश के उप मुख्यमंत्री रहे डाॅ. मंगलसेन को सुप्रीम कोर्ट में यह साबित करना पड़ा था कि वह भारतीय हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद डाॅ. मंगलसेन रोहतक से सात बार न केवल विधायक बने, बल्कि 1982 में प्रदेश के गृहमंत्री व 1987 में उपमुख्यमंत्री भी बने। 1990 में उनके देहांत के बाद अब तक भाजपा रोहतक शहर से जीत हासिल नहीं कर सकी है।
शहर के लोगों, खासकर युवा पीढ़ी में बहुत कम जानते हैं कि एक बार मंगलसेन के भारतीय होने पर ही सवालिया निशान लगा दिए गए थे। 27 अक्टूबर, 1927 को उनका जन्म पाकिस्तान स्थित सरगोधा के झावरिया गांव में हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध के समय परिवार बर्मा चला गया, लेकिन बाद में वापस लौटना पड़ा। परिवार के साथ मंगलसेन जालंधर में आकर रहने लगे। बाद में देश के बंटवारे के बाद विस्थापितों के साथ रोहतक आ गए।
1957 में रोहतक से डाॅ. मंगलसेन ने जनसंघ की तरफ से पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ा और पाकिस्तान में विधायक रहीं कांग्रेस प्रत्याशी शन्नो देवी सहगल को हरा दिया। सहगल ने चुनाव ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की कि डाॅ. मंगलसेन देश के नागरिक नहीं हैं, क्योंकि बंटवारे से पहले जन्म के बाद मंगलसेन माता-पिता के साथ बर्मा चले गए और वहां की सरकार से स्थाई तौर पर रहने के लिए अनुमति मांगी। बाद में वे वापस लौट आए और नए सिरे से देश की नागरिकता नहीं ली। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। तीन साल बाद 7 सितंबर 1960 को सुप्रीम कोर्ट ने डाॅ. मंगलसेन को देश का नागरिक माना और सहगल की याचिका रद्द कर दी। इसके बाद डाॅ. सेन 1962, 67, 68, 77, 82 व 87 में विधायक बने। हालांकि 1972 व 1985 के उप चुनाव में सेठ श्री किशनदास से हार गए।