रोहतक. एक ओर केंद्र व प्रदेश सरकार जहां बुजुर्ग को सहूलियत और सम्मान दिलाने की कोशिशों में लगी हैं, वहीं परिवहन विभाग की सहकारी बस में रियायती दर का टिकट मांगने पर कंडेक्टर व बस मालिक के बेटे ने बदसलूकी व पत्नी सहित उन्हें धकेल कर बस से बाहर फेंक दिया। पीड़ित बुजुर्ग ने कहा कि वे अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक, आलाधिकारियों के साथ परिवहन मंत्री से भी करेंगे।
पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे सोनीपत
शहर में काठमंडी निवासी मंगतराम जांगिड़ एचएमटी पिंजौर से रिटायर्ड है। दो दिन पहले वे परिवार के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए
सोनीपत गए थे। सोमवार की दोपहर वे रोहतक लौट रहे थे। दिन में 2:45 बजे सोनीपत के कालूपुर चुंगी से बस संख्या एचआर 46 डी 6889
में बैठे।
उन्होंने 50 रुपए के नोट देकर दो सीनियर सिटिजन का टिकट मांगा तो इस पर बस कंडक्टर भड़क गया और उसने कहा कि पूरे टिकट का पैसा दो नहीं तो बस से बाहर फेंक दू्ंगा। मना करने के बाद भी उसने बस रुकवाई और मंगतराम को पत्नी भगवंती देवी समेत अपमानित करते हुए बस से नीचे उतार दिया।
दूसरी बस में भी नहीं मिला वरिष्ठता का लाभ
दूसरी निजी बस से पीड़ित दंपति रोहतक आए। इस बस में भी सीनियर सिटिजन का लाभ
नहीं मिला। मंगतराम ने बताया कि उनके पास सीनियर सिटिजन के अलावा आधार कार्ड भी है। उन्होंने उसका हवाला दिया फिर भी कंडेक्टर ने एक न सुनी। वे जब रोडवेज विभाग के नियम के अनुसार अनुबंधित बसों में भी सीनियर सिटिजन का किराए में छूट देने का प्रावधान है, तो किस आधार पर पूरा पैसा लिया और बदतमीजी के साथ कंडेक्टर ने उन्हें बस से बाहर फेंका। इसकी शिकायत वे एसपी, परिवहन विभाग के अधिकारियों व परिवहन मंत्री से मिलकर करेंगे।
बुजुर्ग के घर जाकर माफी मागूंगा : बस मालिक
मेरी बस का कंडेक्टर मूर्ख था। उसने बुजुर्ग और उनकी पत्नी के साथ बदतमीजी करने के बाद बस से धक्का देकर नीचे कर दिया। घटना की जानकारी होते ही कंडेक्टर को बस से उतार दिया। मैं बुजुर्ग के घर जाकर उनसे माफी मांगूगा।
-राजकुमार, बस मालिक, नयाबांस सांपला।
निजी बस चालक तोड़ रहे कानून
रोडवेज विभाग से सहकारी बसों के ड्राइवर व कंडक्टर बेलगाम हैं। उनके द्वारा रोज कानून तोड़ा जा रहा है। यात्रियों के साथ बदसलूकी की भी घटनाएं अाम हैं। ये बसें मनमर्जी रुट पर चलती हैं, मुंह मांगा किराया भी वसूलती हैं। रोडवेज बसों की तरह इन्हें भी यात्रियों को सारी सहूलियतें देनी हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता है। इनके खिलाफ कार्रवाई करने में रोडवेज प्रबंधक तक असहाय हैं। क्योंकि इनकी अथॉर्टी आरटीए है, जो इनकी शिकायत सुनने को तैयार नहीं होता है। पुलिस अथवा परिवहन मंत्री से शिकायत करना ही आखिरी रास्ता है।
-धर्मबीर हुड्डा, महासचिव-हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन।