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संघर्ष करने वालों के कदमों में होता है जहान, छात्रों की मदद में पाता है सुकून

7 वर्ष पहले
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रोहतक। मुश्किलों में भागना आसान होता है, हर पहलू जिंदगी का इम्तिहान होता है, डर कर भागने वालों को कुछ नहीं मिलता, संघर्ष करने वालों के कदमों में जहान होता है। इन पंक्तियों को लिखने वाला जब जन्म से ही अशक्त और हाथ-पैर से बेजान है। हर कोई भविष्य को लेकर शंकित था, लेकिन बुलंद इरादों के साथ पहली कक्षा से बीकॉम तक की पढ़ाई में टॉप किया और अब आईएएस बनकर देश सेवा करना उसका सपना है, जिसे वो किसी भी सूरत में साकार करना चाहता है। यह कहानी है राकेश (20 वर्ष) की, जो महम के मोखरा निवासी किसान रणबीर सिंह का बेटा है।
दादा से मिला जुनून, सपनों ने भरी उड़ान
फौज में हवलदार रहे दादा फत्ते सिंह की परवरिश में राकेश पला बढ़ा है। स्कूल से दसवीं तक और फिर कलानौर स्थित सीबीएससी बोर्ड के स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहा, लेकिन बीकॉम करने के लिए घर वालों ने मना कर दिया। जैसे तैसे मां-बाप को राजी कर गौड़ ब्राह्मण डिग्री कॉलेज से बीकॉम किया। यहां पर विश्वविद्यालय स्तर पर 44वां स्थान अर्जित किया। फिलहाल बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र राकेश जिंदगी की हर बाजी जीतने के लिए जतन से लगा है।
फ्री में ट्यूशन देकर कर रहा रिवीजन

एकाउंट में 90 फीसदी तथा मैथ में 95 फीसदी अंक लेने वाले राकेश को अनिल अंबानी फाउंडेशन द्वारा 2011 में प्रदेश के पांच बच्चों में शामिल होकर पुरस्कृत किया गया। लेखन, कविता हो या भाषण प्रतियोगिता राकेश हमेशा सबसे आगे रहा है। 6 सितंबर को कॉलेज में आयोजित अंग्रेजी की प्रतियोगिता में टॉप किया। प्रतिदिन शाम को राकेश घर पर 15 बच्चों को फ्री में टयूशन दे रहे हैं। मकसद युवाओं की मदद के साथ आईएएस की तैयारी का रिवीजन करते रहना है।
(बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र राकेश कुमार को भाई ट्राई साइकिल से काॅलेज ले जाता हुआ।)