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कार्तिक पूर्णिमा पर आस्था की खातिर महिलाओं ने उठाया जोखिम

7 वर्ष पहले
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रोहतक। कार्तिक पूर्णिमा पर गुरुवार गोधूली बेला में रोहतक-पानीपत रूट की रेल पटरी पर सपनों के घर बना दीये जलाए। मौका था पंजाबी समुदाय की महिलाओं द्वारा सोहाग पूर्णिमा के व्रत करने का, जिसमें दिनभर निराजल व्रत रह सुख-समृद्धि और परिवार के सलामती की दुआएं मांगी गई। सदियों पुरानी परंपरा को निभाने के लिए महिलाओं ने जोखिम तक की परवार नहीं की। शाम 5:45 बजे की पैसेंजर ट्रेन के आने पर अभिभावकों ने उन्हें पटरी से दूर किया।
करवा चौथ जैसा व्रत
सोहाग पूर्णिमा का व्रत करवाचौथ के व्रत के समान मान्यता रखता है। इस मौके पर सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से सूर्यास्त तक बिना अन्न-जल के व्रत करती हैं। शाम को नए वस्त्र व आभूषण में सज-धज कर रेल की पटरी पर पहुंचती हैं। पहले चाहत के अनुरूप घर बनाया जाता है। फिर उसमें घी के दीये रौशन किए जाते हैं और हवा के झोकों से हिफाजत के लिए आंचल का सहारा लिया जाता है।
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