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बहन की मौत के बाद भी नहीं टूटा जज्बा, इस बच्चे ने बचाई थीं 60 जिंदगियां

8 वर्ष पहले
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रोहतक. हर साल बहादुरी के लिए बच्चों को गणतन्त्र दिवस पर सम्मानित किया जाता है। हरियाणा के बच्चे भी इसमें शामिल हैं। dainikbhaskar.com आज आपको बताने जा रहा है हरियाणा के बहादुर किशोर गौरव सैनी के बारे में जिन्होंने 2008 में अपनी जान की परवाहन न करते हुए 60 जिंदगियां बचाई थीं।
आम बात है अगर कोई बच्चा रोता या किसी दर्द से पीड़ित रहता है तो बड़े दिलासा देने के लिए कहते है, चुप हो जाओ बेटे तुम तो मेरे बहादुर बच्चे हो न और ये सुन के बच्चा खुद को वाकई में बहादुर समझने लगता है। उसका आत्मविश्वास बढ़ जाता है। कहते हैं अगर दिल में बहादुरी का जज्बा हो तो उम्र की जंजीरें बहुत कमजोर हो जाती हैं।
3 अगस्त 2008 को नैना देवी हिमाचल प्रदेश में मची भगदड़ के दौरान अपनी जान की परवाह न करते हुए 60 जिंदगियां बचाई थी। मगर औरों की जिंदगियां बचाने में कामयाब हुए किशोर की सगी बहन की भगदड़ के दौरान मौत हो गई थी, लेकिन गौरव को इस बात का संतोष है कि जिन्हें उसने मौत के मुहं से निकाला, वे भी किसी के भाई-बहन है। फतेहबाद के टोहाना कस्बे में रहने वाले 15 वर्षीय बहादुर किशोर गौरव सैनी को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा वीरता पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं।
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