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मेरा चैलेंज है कोई साबित कर दे मेरे पिता 'आया राम-गया राम' थे

7 वर्ष पहले
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भिवानी। जिले के लोहारू हलके से चार बार विधायक रहे हीरानंद आर्य भी उस दौर के गवाह रहे जब विधायक बड़ी तेजी से निष्ठाएं बदलते थे। सरकार बनती-टूटती रहती थी। प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री भगवत दयाल शर्मा की कांग्रेस सरकार तोड़कर जब 1967 में राव बीरेंद्र सिंह ने गैर कांग्रेसी सरकार बनाई। तब कांग्रेसी विधायक आर्य ने समर्थन दिया। उन्हें कृषि मंत्री बनाया गया।
लेकिन दो दिन बाद ही उन्होंने चौधरी देवीलाल के कहने पर पद और सरकार छोड़ दी थी। आर्य के बेटे रिटायर्ड विंग कमांडर संदीप पायलट यह कतई नहीं मानते कि आया राम-गया राम का मुहावरा उनके पिता के लिए है। वे चैलेंज करते हैं कि कोई इस बात को साबित करके दिखाए। भास्कर से बातचीत में पायलट ने कहा कि उनके पिता की शुरू से ही चौधरी देवीलाल में निष्ठा थी और उन्होंने एंटी बंसीलाल राजनीति की।
एडवोकेट हीरानंद आर्य

पहले सरपंच बने, फिर ब्लॉक समिति के चेयरमैन। 28 की उम्र में विधायक बने।
काउंटर इंटरव्यू-संदीप पायलट से पिता जी चौधरी देवीलाल व चरण सिंह के साथ रहे, हमेशा एंटी बंसीलाल राजनीति की
Q. जब आपके पिता कांग्रेस के विधायक थे, फिर गैर कांग्रेसी सरकार को समर्थन क्यों दिया?

A. दो बातें हैं। एक तो उस वक्त कोई दल-बदल कानून नहीं था। दूसरा, तब मुख्यमंत्री की कुर्सी हथियाने के लिए गुटबंदी व गफलत का दौर था। कई गुट बन गए थे। हर गुट ज्यादा से ज्यादा विधायकों को अपने पाले में लाने के लिए जोर लगाता था। राव बीरेंद्र ने सरकार बनाने के लिए पिता जी का समर्थन लिया और कृषि मंत्री बनाया। पिता जी चौधरी देवीलाल का सम्मान करते थे। इसलिए उनके कहने पर तुरंत भिवानी आकर इस्तीफा दे दिया।

Q. पहले कांग्रेस, फिर हरियाणा विशाल पार्टी, उसके बाद जनता पार्टी और लोकदल में गए। इसी वजह से आपके पिता के लिए आया राम-गया राम का उदाहरण बना?
A. बिल्कुल गलत। यह मुहावरा पापा के लिए नहीं है। उनकी निष्ठा चौधरी चरण सिंह और चौधरी देवीलाल में रही। इसी वजह से जिस दल में ये नेता गए, वहीं िपता जी रहे। मेरे पिता ने न तो कभी दल-बदलने की एवज में कोई फायदा नहीं लिया और न सरकार में रहकर। 1978 में देवीलाल की सरकार में साल भर शिक्षा मंत्री रहे। 1989-90 में बनारसी दास गुप्ता के नेतृत्व में बनी जनता दल सरकार में वित्त मंत्री भी रहे। मेरा चैलेंज है, कोई साबित कर दे कि आर्य साहब ने कभी किसी से रिश्वत ली हो। यहां तक कि उन्होंने तो एमएलए कोटे से भी कोई प्लॉट या फ्लैट तक नहीं लिया। मैं अपने दम पर वायुसेना में अफसर बना। मीडिया गलत उदाहरण न दे।

Q. तो आपके पिता किसकी विचारधारा से प्रभावित रहे?

A. वह शुरू से ही चौधरी देवीलाल के समर्थक रहे और बंसीलाल का विरोध किया। इसी वजह से 1975 में इमरजेंसी के दौर में उन्हें 18 महीने के लिए जेल भेजा गया। 1977 में िपता जी जनता पार्टी से विधायक बने। बाद में जब भजन लाल 28 विधायक लेकर अलग हो गए तब भी पिता जी देवीलाल के साथ रहे। 1982 और 87 में भी देवीलाल की पार्टी से विधायक बने। 1991 में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। जबकि 1996 में ओमप्रकाश चौटाला के नेतृत्व में चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। 1998 में उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर ली, लेकिन उनकी राजनीति में सक्रियता कम हो गई। अब मैं भी इनेलो की विचारधारा से जुड़ा हूं।

Q. आपकी नजर में क्या वर्तमान दल-बदल कानून सही है?

A. हां, दल-बदल कानून का औचित्य तो सही है, लेकिन यह उतना प्रभावी नहीं। इसकी वजह है, निर्णय लेने में देरी होना। उदाहरण सामने है। (2009 में हजकां के 5 विधायक कांग्रेस में चले गए, लेकिन उन्हें अयोग्य ठहराने वाली याचिका पर विधानसभा स्पीकर का फैसला तब आया, जब विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने को था।)
राई स्पोर्ट्स स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद नेशनल डिफेंस एकेडमी ज्वाइन की। पोखरन परमाणु विस्फोट के दौरान डॉ. अब्दुल कलाम की टीम के सदस्य थे। 2009 में निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।