फाइल फोटो- महिला पहलवान गीता फोगट।
रोहतक. हरियाणा की राजधानी से बमुश्किल 10 किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव बलाली गांव की यह बेटी आज देश की एथलीट स्टार हैं। हम बात कर रहे हैं स्टार रेस्लर गीता फोगट की। 2012 के लंदन ओलिंपिक में हिस्सा लेकर इतिहास रचने वाली गीता आज (15 दिसंबर) अपना 26वां जन्मदिन मना रही हैं। लैंगिक भेदभाव और सम्मान के नाम पर हत्या किए जाने के लिए कुख्यात हरियाणा के इस गांव जब फोगट परिवार की इस बेटी ने अखाड़े में कदम रखा था तब विरोध में पूरा गांव परंपरा की दुहाई देते हुए उठ खड़ा हुआ था। यही नहीं इन्हें बेशरम कहा गया और ताने भी सुनने पड़े, लेकिन अब फोगट परिवार की इस बेटी पर सिर्फ इस गांव को ही नहीं बल्कि पूरे देश को नाज है।
ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली महिला खिलाड़ी
गीता भारत की पहली महिला खिलाड़ी है, जिन्होंने ओलिंपिक में कुश्ती के लिए क्वालिफाई किया। कर्णम मल्लेश्वरी को पहली बार ओलिंपिक में मेडल जीतते देख गीता के पिताजी महावीर सिंह को भी लगा कि उनकी बेटियां भी खेलों में पदक जीत सकती हैं। इसके बाद उन्होंने घर पर बने अखाड़े में ही ट्रेनिंग देना शुरू किया। उस समय गीता की उम्र 13-14 साल की थी। गीता के पिता खुद राज्य स्तरीय पहलवान और बेटी के कोच हैं। राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद महावीर ने बेटी की जिद पर उसे ट्रेनिंग के लिए एनआईएस, पटियाला भी भेजा।
दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत रचा था इतिहास
अगर आपने 25 साल की गीता फोगट का नाम अभी तक नहीं सुना है, तो जरा अपने दिमाग पर जोर डालिए और 2010 में भारत में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल खिलाड़ियों की लिस्ट पर नजर दौड़ाइए। आपको जानकर खुशी होगी कि गीता भारत की पहली ऐसी महिला पहलवान हैं, जिन्होंने 55 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।
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