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जब प्रशासन ने किया हस्तक्षेप, उसके बाद दफनाई जा सकी एक दिन की बच्ची

9 वर्ष पहले
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रोहतक/सांपला. हसनगढ़ गांव में अल्पसंख्यक समुदाय की एक दिन की बच्ची को दफनाने के लिए जमीन नहीं दिए जाने पर शुक्रवार को परिजनों ने अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया। एसडीएम जगदीश शर्मा के हस्तक्षेप के बाद बच्ची को गांव की जमीन में दफनाया।


हसनगढ़ गांव निवासी चांद की पत्नी सजना को डिलीवरी हुई। एक दिन की बच्ची की हालत सही नहीं होने पर गांव के चिकित्सकों ने उसे पीजीआई रोहतक रैफर कर दिया, लेकिन यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बाद में परिजन उसे गांव ले गए, लेकिन कब्रिस्तान नहीं होने से परेशानी में आ गए।

इसके बाद शुक्रवार को शीशे वाली मस्जिद में पहुंचे। यहां समाज के कुछ मौजिज लोगों ने बैठक कर डीसी से मिलने का निर्णय लिया। सभी डीसी के पास पहुंचे। उन्होंने एसडीएम के पास भेज दिया। एसडीएम ने पटवारी को जमीन की निशानदेही करने के दिशा-निर्देश दिए।