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देश और प्रदेश को आईएएस-आईपीएस अफसर देने वाली हवेली समर्पित

7 वर्ष पहले
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झज्जर। गांव की जिस हवेली ने देश व प्रदेश की जनसेवा के लिए एक दर्जन से ज्यादा आईपीएस, आईएएस, ए-वन क्लास व सेना के अफसर दिए वही हवेली अब गांव के युवाओं का मार्ग प्रशस्त करेगी। झज्जर के डाबौदा खुर्द में मौजूद दलाल परिवार की इस हवेली को पढ़ाई के लिए गांव के हवाले करने का जज्बा प्रदेश के पूर्व पुलिस प्रमुख रंजीव दलाल ने दिखाया है। शुक्रवार को विधिवत रूप से इसे गांव के हवाले कर दिया जाएगा। बता दें कि गांव के समृद्ध किसान परिवार में जन्मे चौ. रामपत ने आजादी से पहले जो नई सोच दिखाई तो उनके बाद की पीढ़ी उसे शिक्षा के क्षेत्र में आगे तक ले गई। चौ. रामपत ने उस जमाने में गांव में पक्की हवेली बनाई जब ब्रिटिश सरकार भी इस दिशा में बड़े शहरों में पहल कर रही थी।
हवेली ने ये दिए अधिकारी

हवेली बनाकर चौ. रामपत ने फिर अपने पुत्रों को भी इसी मजबूती के साथ शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाया। परिवार के बड़े बेटे हरद्वारीलाल को लायलपुर में शिक्षा के लिए भेजा। आगे जाकर ये संयुक्त पंजाब में पशु पालन विभाग के अधिकारी बने। इसके बाद जय लाल भी कृषि विभाग के देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक बने। इनके भाई उदय सिंह दलाल भी लायलपुर शिक्षा के लिए गए और बाद में सिंचाई विभाग के ए-वन क्लास अफसर के रूप में पाकिस्तान तक में तैनात रहे।
इस पीढ़ी के बाद जो पीढ़ी आई उसने आजादी के शुरुआती दौर और उसके बाद भी परिवार की पड़ी शिक्षा की नींव को मजबूती देने का सिलसिला जारी रखा। न सिर्फ पुरुष बल्कि महिलाएं भी इसी हवेली की परंपरा में ढलकर अफसर बनीं। इनमें प्रदेश की पहली आईएएस अफसर कमला चौधरी शामिल हैं।

इनके भाई आईपीएस रंजीव दलाल प्रदेश पुलिस प्रमुख पद से सेवानिवृत्त हुए। इसी परिवार के रघुवीर सिंह नेवी अफसर, जगजीत दलाल सेना में बिग्रेडियर व परिवार की एक अन्य बेटी रीना ढाका ए-वन क्लास अफसर बनी। अब दलाल परिवार के इन सेवानिवृत्त अफसरों के बाद की पीढ़ी इसी परंपरा को आग बढ़ा रहे हैं।
1869 में बनी इमारत निर्माण कला का नमूना
बहादुरगढ़ और झज्जर में ऐसी बहुत ही कम हवेलियां हैं जो प्रथम विश्वयुद्ध के समय तैयार हुई। इनमें डाबौदाखुर्द में बनी दलाल हवेली है। इसे चौ. रामपत दलाल ने बनाया था, जो अब भी क्षेत्र में भारतीय निर्माण कला का अनूठा उदाहरण है। इस हवेली की अहम बात ये है कि दलाल परिवार ने इसे अब तक सहेज और संवारकर रखा है। मौसम का असर इस पर नहीं होने दिया गया। लाल छोटी ईंटें-चूना और पक्के पत्थर से बनी ये हवेली मौसम के अनुकूल भी बनी हुई है। इसमें लकड़ी के सुंदर खिड़की -दरवाजे पर नक्काशी और दीवारों पर प्राकृतिक रंगों की चित्रकारी है। दलाल परिवार ने कुछ महीने पहले ही हेरिटेज का काम देखने वाली एजेंसी से इसे और मजबूती प्रदान कराई।