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समावेशी शिक्षा के तहत अशक्त बच्चों के लिए स्कूलों में सुविधा जरूरी: बेरवाल

8 वर्ष पहले
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रोहतक। अशक्त बच्चों के लिए स्कूलों में रेम्प का होना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर स्कूलों का नक्शा पास नहीं होगा और शिकायत पर मान्यता भी रद्द की जा सकती है। यह बात बीपीएसआईटीटीआर (भगत फूलसिंह टीचर्स ट्रेनिंग एंड इंस्टिट्यूट) के असिस्टेंट प्रोफेसर संदीप बेरवाल ने भास्कर से बातचीत के दौरान कही। वे शनिवार को छोटू राम कॉलेज ऑफ एजुकेशन में समावेशी शिक्षा पर हुई सेमिनार में आए थे।

उन्होंने बताया कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में अशक्त बच्चों के लिए रेम्प बनाना अब निजी स्कूलों के लिए भी लागू होगो। शिक्षा अभियान की ओर से रेम्प के लिए अनुदान भी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत हर सरकारी स्कूल में तीन हजार रुपए अनुदान दिया जाता है, जिसमें करीब एक हजार रुपए असक्षम बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक के लिए व बाकी रेम्प बनाने, सहायक उपकरण व स्वास्थ्य शिविर आदि के लिए होता है।

यह है समावेशी शिक्षा

सोनीपत से आए टीआर कॉलेज ऑफ एजुकेशन के ऑफिशिएटिंग प्रिंसिपल डॉ. एसएस राणा ने बताया कि असक्षम बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था के तहत शुरू की शिक्षा व्यवस्था का ये तीसरा चरण है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत अशक्त बच्चों के लिए विशेष शिक्षा व्यवस्था पर जोर देते हुए इन बच्चों को मुख्यधारा में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

इनके लिए स्कूलों में विशेष पाठ्यक्रम और अन्य व्यवस्था के अंतर्गत म्यूजिक थेरेपी, खेल प्रतियोगिता व सहायक उपकरण आदि की भी व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि असक्षम बच्चे अपने को अलग समझकर हीनभावना ना पाल लें, इसलिए अब सामान्य स्कूलों में ही उन्हें शामिल करने पर लगातार काम चल रहा है। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षकों की भी व्यवस्था है, जिन्हें इन बच्चों के साथ तालमेल बैठाते हुए मानसिक विकास के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।