रोहतक. बहुचर्चित सतलोक आश्रम को खाली कराने की मांग को लेकर हिंसक झड़प में तीन लोगों की जान जाने के बाद सोमवार को सुबह 10 बजे ही गांव बलियाणा व आसपास के आर्यसमाजी पीजीआई के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जमा हो गए।
अर्बन एस्टेट थाना प्रभारी सत्यनारायण वर्मा भी पुलिस बल के साथ वहां पहुंच गए। पुलिस ने करौंथा निवासी प्रोमिला और संदीप निवासी शाहपुर (पानीपत) के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के हवाले कर दिए। इसके बाद जब पुलिस ने उदयवीर के पोस्टमार्टम के लिए परिजनों से बात की और वे भड़क गए।
काफी देर हंगामे के बाद परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने व शव को लेने से मना कर दिया। परिजनों ने कहा कि उदयवीर का शव आचार्य बलदेव ही लेंगे। जब तक आचार्य यहां नहीं आते वे शव को नहीं लेंगे। इस दौरान इन लोगों ने संत रामपाल, प्रशासन व प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर अपनी भड़ास निकाली।
बेकार नहीं जाएगी मौत
करीब 3.50 बजे आचार्य बलदेव पीजीआई पहुंचे और लोगों को संबोधित किया। आचार्य बलदेव कहा कि उदयवीर की मौत बेकार नहीं जाएगी, वह समाज व देश के लिए शहीद हुआ है। उदयवीर को खोने का उसके परिवार के साथ-साथ पूरे समाज को नुकसान हुआ है। आचार्य के संबोधन के बीच में ही लोगों ने बोलना शुरू कर दिया। आचार्य ने जब कहा कि उदयवीर का पोस्टमार्टम मंगलवार को होगा, तो लोग बिफर पड़े और एक साथ हाथ उठाकर कहा कि पोस्टमार्टम आज ही कराया जाए और शव को करौंथा ले जाकर रोड पर रखा जाए, ताकि मांगों को मनवाया जा सके।
जमकर नोक-झोंक
इस पर मामला बिगड़ गया और आंदोलनकारी दो धड़ों में बंट गए। दोनों पक्षों में जमकर नोक-झोंक भी हुई। इस दौरान लोगों ने आचार्य से भी अपील की कि वे समाज के लोगों को सड़कों पर आने के लिए कहें। एक घंटा तक हंगामे के बाद फिर से मीटिंग हुई। मीटिंग में फैसला लिया गया कि मंगलवार को शव करौंथा ले जाया जाएगा ।
आचार्य बलदेव ने घोषणा की कि ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान किया जाएगा। उनका संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है। उदयवीर के बड़े भाई बीएसएफ में तैनात नीरज के आने के बाद मंगलवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा। उदयवीर के शव को शहीद की तरह जुलूस के रूप में करौंथा ले जाया जाएगा। 5.20 बजे आचार्य बलदेव समर्थकों के साथ करौंथा के लिए रवाना हो गए। इसके बाद ग्रामीण भी वहां से हट गए।
प्रोमिला के संस्कार को लेकर आमने-सामने
पीजीआईएमएस के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर प्रोमिला के अंतिम संस्कार को लेकर परिजन, ससुराल पक्ष और आर्यसमाजी आमने सामने हो गए। मूलरूप से मदीना की बेटी प्रोमिला के परिजन उसके शव को गांव ले जाने के लिए दबाव बनाने लगे, लेकिन ससुराल पक्ष के लोग करौंथा में ही अंतिम संस्कार करने पर अड़ गए।
इस पर आर्य समाजियों ने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक अंतिम संस्कार न किया जाए। परिजनों ने कहा कि वे नहीं चाहते कि शव को लेकर कोई राजनीति की जाए। ग्रामीणों में बढ़ते विवाद को देखते हुए महम के विधायक आनंद सिंह दांगी के पुत्र बलराम दांगी व ग्रामीण कांग्रेस के अध्यक्ष जयदीप धनखड़ दोनों पक्षों को समझाने लगे।
करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद ग्रामीण इस पर सहमत हुए कि अंतिम संस्कार गांव करौंथा में ही होगा और कोई भी व्यक्ति राजनीति नहीं करेगा। प्रोमिला के पति कृ़ष्ण ने कहा कि गांव की जमीन से आश्रम को हटाया जाए। आश्रम की वजह से ही गांव का माहौल खराब हो रहा है। गोली चलाने वाले आरोपियों को कड़ी सजा मिले। उन्होंने प्रशासन की निष्क्रियता पर भी निशाना साधा।
सीएम हाउस बना पुलिस छावनी
सीएम हाउस के बाहर शव रखकर प्रदर्शन करने की सूचना से प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। आनन-फानन में करौंथा से आरएएफ की एक कंपनी व पुलिस की दर्जनों गाड़ियों को डी पार्क पर तैनात कर दिया गया और सीएम हाउस पुलिस छावनी नजर आने लगा। मेडिकल मोड़ से लेकर डी पार्क तक सुरक्षा ब्रलों की गाड़ियां ही नजर आई। इसके साथ-साथ डेड हाउस से मेडिकल मोड़ तक जगह-जगह पुलिस के जवान तैनात कर दिए गए।
सुबह करीब दस बजे शाहपुर के ग्रामीण बिना किसी विरोध के शव लेकर रवाना हो गए। इसके बाद प्रोमिला के परिजन डेड हाउस पहुंचे। वहां पर मदीना गांव से आए प्रोमिला के मायके वालों के दखल के बाद मृतका के परिजन शव ले जाकर अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार हो गए। मदीना से दर्जनों ग्रामीण प्रोमिला के शव के साथ करौंथा पहुंचे, ताकि जल्द अंतिम संस्कार कराया जा सके, लेकिन करौंथा के ग्रामीणों के कड़े विरोध के चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा।