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महिला सब इंस्पेक्टर ने भागकर बचाई जान, स्कूटी में लगाई आग

8 वर्ष पहले
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रोहतक. करौंथा के सतलोक आश्रम को लेकर हिंसा को रोकने में रणनीतिक तौर पर नाकाम रहा जिला प्रशासन अब तनावपूर्ण परिस्थितियों से निपटने की बजाए मूक दर्शक बना हुआ है।
खुफिया तंत्र की नाकामी के चलते आंदोलनकारियों से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर बैठी पुलिस को उनके अगले कदम की भनक तक नहीं लग पा रही है। ऐसे में पुलिस की भूमिका जहां आश्रम की सुरक्षा तक सिमटी हुई है, वहीं प्रशासन के आला अधिकारी केवल बंद कमरों में रणनीति बनाने में लगे हुए हैं। विवाद निपटाने की दिशा में सभी प्रयासों के परिणाम अभी तक शून्य हैं, जिसके चलते रोहतक-झज्जर मार्ग लगातार दूसरे दिन भी बंद रहा।
हिंसा के बाद रविवार देर शाम करौंथा पहुंचे डीजीपी एसएन वशिष्ठ देर रात दिल्ली बाईपास स्थित सर्किट हाउस पहुंचे। सुबह उठते ही आईजी आवास पहुंच कर अधिकारियों की बैठक ली। इसमें आईजी अनिल राव, डीसी विकास गुप्ता, एसपी विवेक शर्मा व डीएसपी सुमित कुमार के साथ मिलकर हालात से निपटने के लिए विचार विमर्श किया।
अधिकारी अभी मंथन कर ही रहे थे कि सूचना मिली कि शाहपुर गांव से संदीप का शव लेने पीजीआई के डेड हाउस पहुंचे ग्रामीण सीएम हाउस के बाहर शव रखकर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं।
महिला सब इंस्पेक्टर ने भागकर बचाई जान, स्कूटी में लगाई आग
सोमवार सुबह छह बजे ही 30 से 40 युवा गांव के बाहर बालंद मोड़ पर पहुंच गए। आधा घंटा बाद डीघल गांव की तरफ से सुनारिया पुलिस अकादमी में ड्यूटी पर स्कूटी से जा रही महिला सब- इंस्पेक्टर मीना अहलावत बालंद मोड़ पर पहुंची। भीड़ द्वारा रास्ता रोकने के बाद मीना स्कूटी छोड़कर एक तरफ खड़ी हो गई। तभी कुछ युवकों ने स्कूटी में आग लगा दी।
महिला सब इंस्पेक्टर डर के मारे वापस आश्रम की तरफ तैनात पुलिस के बीच पहुंच गई। थोड़ी देर बाद गांव से एक युवक ट्रैक्टर लेकर सड़क पर पहुंचा और स्कूल मैदान में पुलिस जवानों के लिए दो दिन पहले लाए गए पानी के टैंकरों को सड़क पर लाकर उलट दिए। साथ ही टायरों में आग लगा दी। इसके बाद रोडवेज की आधी जली बस को दोबारा आग के हवाले कर दिया गया। एक तरफ आगजनी होती रही, दूसरी तरफ आश्रम के बाहर तैनात पुलिस आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा सकी।
समाधान की हिम्मत जुटाने में प्रशासन नाकाम
हिंसक झड़प के बाद असहाय नजर आ रही पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। हालत यह है कि पुलिस के अधिकारियों को यह तक नहीं पता चल रहा कि करौंथा में बालंद रोड पर जमा ग्रामीण क्या रणनीति बना रहे हैं। इसे देखते हुए आगे क्या कदम उठाए जाएं? सतलोक आश्रम की सुरक्षा में तैनात सैकड़ों पुलिसकर्मी आश्रम के बाहर व आसपास खेतों में डेरा डालकर केवल इंतजार करते नजर आ रहे हैं। प्रशासन या पुलिस का कोई प्रतिनिधि या मध्यस्थ ग्रामीणों के बीच हालात के समाधान की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहा है।
मीडिया से अफसरों की दूरी बरकरार
करौंथा प्रकरण से निपटने में नाकाम प्रशासन लगातार मीडिया से दूरी बनाए हुए है। बार-बार संपर्क करने के बावजूद अधिकारी अधिकारिक तौर पर कोई जवाब देने के लिए तैयार नहीं हैं। करौंथा कांड की नाकामी से सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आ रहे स्थानीय अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि अधिकारियों ने निचले स्तर के अधिकारियों तक को मीडिया में कोई बयान देने से सख्त मना कर रखा है।
लगातार दूसरे दिन रोहतक-झज्जर मार्ग बंद
करौंथा के सतलोक आश्रम को लेकर हुई हिंसा के चलते लगातार दूसरे दिन रोहतक-झज्जर मार्ग बंद रहा। इससे सबसे ज्यादा परेशानी आसपास के गांवों जाने वाले ग्रामीणों को हो रही है। सोमवार सुबह ग्रामीणों ने करौंथा व डीघल के बाद बालंद व गोच्छी में भी कुछ समय के लिए रोड जाम कर दिया। सीधे झज्जर जाने वाले वाहन चालक तो वाया सांपला व भापड़ौदा होते हुए झज्जर से रोहतक आवागमन कर रहे हैं, लेकिन आसपास के ग्रामीण रास्ते बंद होने के कारण काफी परेशान हैं।