रोहतक . करौंथा गांव में खूनी संघर्ष के बाद ग्रामीण महिला प्रोमिला के शव के साथ सड़क पर डटे हुए हैं। साथ ही शर्त रखी है कि जब तक प्रशासन पब्लिक के बीच छह सूत्री मांगपत्र पूरा नहीं करता, अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों व आर्य समाजियों द्वारा आश्रम खाली कराने की मांग से प्रशासन की सांसें फूली हुई हैं। इससे पहले, रातभर आरएएफ व पुलिस की टीम करौंथा के सतलोक आश्रम की सुरक्षा में तैनात रही।
6 मांगे रखी प्रशासन के सामने
आचार्य ब्रह्मानंद की अध्यक्षता में आचार्य कर्मबीर ने सतगामा के प्रधान प्रकाश, 17 गांव के प्रधान जगबीर सिंह, रिठाल गांव के सरपंच उमेद सिंह व अन्य ग्रामीणों की सहमति से छह सूत्री मांग पत्र तैयार किया। सबसे पहले करौंथा के सतलोक आश्रम को खाली कराया जाए। दूसरा, मृतकों को शहीद का दर्जा दिया जाए। तीसरा, आचार्य बलदेव को रिहा कर आर्य समाजियों व ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज सभी केस वापस लिए जाएं।
चौथा, मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी मिले। पांचवां, आश्रम की जगह गौशाला खोली जाए और छठा, प्रोमिला को गोली मारने वालों के खिलाफ केस दर्ज कर आश्रम से अवैध हथियार बरामद किए जाएं। सभी छह मांगें पूरी होने के बाद ही प्रोमिला व उदयवीर शास्त्री के शवों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। लदेव, सतबीर शास्त्री व आचार्य चंद्रदेव ग्रामीणों के बीच पहुंचे। पहले सतबीर शास्त्री ने बताया कि उनकी प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत हुई। उम्मीद है जल्द पूरे प्रकरण का हल निकल जाएगा। इसके बाद आचार्य बलदेव ने कहा कि हिंसा के दौरान तीन मौत दुखदायक हैं। छह सूत्री मांगों को प्रशासन के सामने रखा जाएगा। वे पूरी तरह से ग्रामीणों के साथ हैं। इसके बाद आचार्य बलदेव रोहतक के लिए रवाना हो गए।
वहीं सुबह ही गांव के कुछ युवकों ने पुलिस जवानों के लिए दो दिन पहले लाए गए पानी के टैंकर सड़क पर लाकर उलट दिए। साथ ही टायरों में आग लगा दी। इसके बाद रोडवेज की अर्ध जली बस को दोबारा आग के हवाले कर दिया गया। एक तरफ आगजनी होती रही, दूसरी तरफ आश्रम के बाहर तैनात पुलिस आज शांत रही।