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'गरजत आयी रे बदरिया' पर झूम उठे श्रोता, राग के जरिए वर्षा ऋतु को किया याद

7 वर्ष पहले
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(राग का आनंद उठाते श्रोता।)
रोहतक। गरजत आयी रे बदरिया कारी-कारी... राग मिया की मल्हार में गुंथे इस गीत को सुनकर हर श्रोता गदगद हो उठा। वर्षा ऋतु के माहौल को सृजित करने के लिए बंदिशें पेश की गई। इन बंदिशों को संगीत विभाग की नेहा और ज्योति ने आवाज दी। इसी तरह से मेघ मल्हार राग की घनन घनन घोर-घोर, घिर-घिर आयी बदरा...की मनभावन प्रस्तुति दी। मौका था, शनिवार को एमडीयू के संगीत विभाग में संगीत के सुरों के नाम आयोजित संगीत संध्या का। लाइव संगीत के इस कार्यक्रम में वर्षा ऋतु पर आधारित बंदिशें प्रस्तुत की गई। विद्यार्थियों ने कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्रोच्चारण से किया।
इस कार्यक्रम में मुख्य कलाकार प्रतिष्ठित गायक हरि किशन शर्मा ने शास्त्रीय गायन से उपस्थित जन को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने राग पूरिया कल्याण में विलंबित ख्याल एवं द्रुत ख्याल प्रस्तुत किया। विलंबित ख्याल के राग में गाये गए आजसू बन बन आयो बनरा... की मद्धिम गति से गाते हुए माहौल को मनमोहक बना दिया।

इसके बाद द्रुत ख्याल राग की प्रस्तुति देते हुए गुंद-गुंद लावो मालन हरवा... और आज मौरे घर आयल बलमा... पर तालियों की गड़गड़ाहट ने हर श्रोता को शास्त्रीय गायन में डुबो दिया।
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