रोहतक। श्रीनगर की त्रासदी से बचना कुदरत का करिश्मा ही था। मेरे और मां-बाप के साथ कुछ भी हो सकता था। आज मेरा जन्मदिन नहीं, पुनर्जन्म है। इसलिए, केक पर दो मोमबत्तियां ही जलाना। बस इतना कहते ही श्रीनगर से घर लौटी जवाहर नगर निवासी अंकुर अरोड़ा की पत्नी प्रीति की आंखें छलक उठीं। फिर क्या था, आफत से रूबरू होने के बाद प्रीति के परिजनों की आंखें भी नम हो गईं। बुजुर्गों ने उसे आशीर्वाद तो छोटों ने जन्मदिन की नहीं, पुनर्जन्म की शुभकामनाएं दीं।
बाढ़ के समय जवाहर नगर निवासी अंकुर अरोड़ा बेटी वानी और पत्नी प्रीति के साथ श्रीनगर में थे। दस दिनों तक जिंदगी-मौत के बीच चले संघर्ष से जीतकर दो दिन पहले ही सकुशल घर लौटे। 15 सितंबर को प्रीति के जन्मदिन पर केक काटा गया। बधाई देने से पहले मोमबत्ती जलाते वक्त प्रीति ने मात्र दो मोमबत्तियां ही जलाने दी। प्रीति के इस भाव से परिजनों ने उसके द्वारा झेले गए दर्द को महसूस कर सहानुभूति जताई। इस मौके पर ससुर नरेंद्र पाल, सास सरला समेत सगे संबंधियों ने आशीर्वाद दिया और उसका हौसला बढ़ाया। बता दें कि अंकुर अरोड़ा श्रीनगर में एक
मोबाइल कंपनी के मैनेजर के पद पर तैनात हैं। बाढ़ के समय घूमने के लिए उनके सास व ससुर श्रीनगर गए हुए थे। वे सब भी बाढ़ में फंसे रहे।
(फोटो- बेटी के साथ प्रीति।)