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अदालत में दोबारा बयान दर्ज कराएंगी रोहतक की आरती और पूजा

7 वर्ष पहले
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रोहतक। रोहतक-सोनीपत रूट पर चलती बस में थाना खुर्द गांव की दो सगी बहनों के साथ कथित छेड़छाड़ व मारपीट के मामले में नया मोड़ आ गया। आरोपी कुलदीप के वकील ने शुक्रवार को एफआईआर को ही फर्जी करार दिया। कहा कि, कहीं भी लड़कियों के बयानों में छेड़छाड़ शब्द नहीं हैं।
ऐसे में पुलिस ने आईपीसी की धारा 354 क्यों लगाई। जबकि लड़की पक्ष के वकील का आरोप है कि जांच अधिकारी ने सही ढंग से लड़कियों द्वारा दी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की। वे सोमवार जिला अदालत में याचिका दायर करके दोबारा सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने की मांग करेंगे।

कोर्ट से पहले मीडिया में बहस शुरू

कुलदीप के वकील संदीप हुड्डा की ओर से सदर थाने में 28 नवंबर को दर्ज एफआईआर नंबर 493 जारी की, जिसमें मोहित, कुलदीप व एक अन्य के खिलाफ आरती की शिकायत पर आईपीसी की धारा 323, 354 व 34 के तहत केस दर्ज किया गया। हुड्डा का कहना है कि एफआईआर के मुताबिक लड़की ने अपने बयान में कहा है कि वे बस में सवार होकर घर के लिए रवाना हुई।
आसन निवासी मोहित व कुलदीप भी चढ़ लिए। यहां पर कहीं भी यह नहीं लिखा कि बस में चढ़ने से पहले लड़कियों की तरफ लड़कों ने कोई मोबाइल नंबर लिखकर फेंका या कोई अपशब्द कहा। केवल यहां लिखा है कि बस में सवार होने के बाद बदतमीजी शुरू कर दी। सीट से उठने के लिए कहने लगे।
साथ ही यह नहीं लिखा कि उन्हें चलती बस से फेंक दिया, बल्कि गिरा दिया। हुड्डा का कहना है कि पूरी एफआईआर ही फर्जी है, बल्कि जो वीडियो क्लिप जारी हुई है, उसमें भी लड़के कहीं भी लड़कियों से मारपीट नहीं कर रहे, बल्कि लड़कियां बेल्ट व लात-घूसे मारकर पिटाई कर रही हैं। पुलिस को लड़कियों के खिलाफ भी केस दर्ज करना चाहिए। उधर, कुलदीप के पिता बलबीर सिंह ने शुक्रवार को मीडिया के सामने सीडी जारी की, जिसमें लड़कियों से परेशान युवक ने अपनी दास्ता बयां की है।
जांच अधिकारी की भूमिका संदिग्ध, दर्ज कराएंगे बयान

पीड़ित पक्ष के वकील अतर सिंह पंवार का कहना है कि आरती ने जो शिकायत पुलिस को दी थी, उसके आधार पर सही ढंग से एफआईआर दर्ज नहीं की गई। दूसरा बदतमीजी शब्द तो लिखा हुआ है, जिसका सीधा मतलब छेड़छाड़ ही है। वे सोमवार को अदालत में याचिका दायर करके दोबारा से आरती व पूजा के मजिस्ट्रेट के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने की मांग करेंगे। जहां तक सीडी का सवाल है, इसकी औपचारिकता व प्रमाणित क्या है। किसने व कैसे इसे तैयार किया है। लड़कियों को इस तरह बदनाम नहीं किया जा सकता है।