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डाउनलोड करें9 जून 2006 : झज्जर के छुड़ानी की कोठी दयाल धाम आश्रम के एक भक्त द्वारा लिखित पुस्तक सैतान बणया भगवान के विरोध में रामपाल समर्थकों ने कोठी दयाल धाम पर हमला बोल दिया। इस हमले में आश्रम प्रमुख ब्रह्मस्वरूप सहित कई लोग घायल हुए।
7 जुलाई 2006 : करौंथा आश्रम से 3 लोग गिरफ्तार किए गए।
8 जुलाई 2006 : करौंथा आश्रम के श्रद्धालुओं ने तीन लोगों की गिरफ्तारी के विरोध में झज्जर-रोहतक हाइवे को जाम कर दिया और गिरफ्तार लोगों को छोड़ने की मांग की। इसी दिन डीघल में 27 खाप के प्रधान जयसिंह की अध्यक्षता में पंचायत हुई।
9 जुलाई 2006 : पंचायत प्रतिनिधियों ने आश्रम की संदिग्ध गतिविधियों को लेकर बहादुरगढ़ आगमन पर सीएम से बातचीत की।
10 जुलाई 2006 : डीघल जाम लगा दिया। गुरु पूर्णिमा पर रामपाल समर्थक आश्रम तक न पहुंचे, इसके लिए ग्रामीण तैनात हो गए।
11 जुलाई 2006 : डीघल व आसपास के ग्रामीण इस बात पर अड़े रहे कि जब तक करौंथा आश्रम के खिलाफ जांच शुरू नहीं होती, तब तक जाम जारी रहेगा। इस तरह जाम चौथे दिन भी जारी रहा।
12 जुलाई 2006 : आश्रम के बाहर उपद्रव, एक की मौत।
13 जुलाई 2006 : आश्रम संचालक रामपाल महाराज को 24 सहयोगियों सहित गिरफ्तार कर लिया गया। तत्कालीन एसडीएम वत्सल वशिष्ठ ने आश्रम को अपने कब्जे में ले लिया।
अगस्त 2006 : रामपाल ने हाईकोर्ट में दी प्रशासन के फैसले को चुनौती।
नवंबर 2009 : हाईकोर्ट का प्रदेश सरकार को आश्रम दोबारा संत रामपाल के ट्रस्ट को सौंपने का आदेश। प्रदेश सरकार और आर्य प्रतिनिधि सभा ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती।
18 फरवरी 2013 : सुप्रीम कोर्ट में सरकार व प्रतिनिधि सभा की याचिका खारिज।
24 फरवरी 2013 : रामपाल के ट्रस्ट ने एसडीएम कोर्ट में आश्रम का कब्जा लेने के लिए लगाई याचिका।
11 मार्च 2013 : एसडीएम ने आश्रम के रिसीवर सदर थाना प्रभारी को पत्र लिखकर जल्द आश्रम को ट्रस्ट के हवाले करने का दिया आदेश।
7 अप्रैल 2013 : गुपचुप तरीके से आश्रम के रिसीवर सदर थाना प्रभारी सतेंदर ने आश्रम ट्रस्ट को सौंप दिया।
9 अप्रैल 2013 : सतलोक आश्रम पर पथराव और रोहतक-झज्जर हाईवे 8 घंटे जाम। आर्य समाजियों को प्रशासन का रात 12 बजे 30 अप्रैल तक आश्रम को दोबारा कब्जे में लेने का आश्वासन, जाम खुला।
10 अप्रैल 2013 : सैकड़ों रामपाल समर्थकों का आश्रम में डेरा, करौंथा में धारा 144 लागू।
11 अप्रैल 2013 : प्रशासन ने सतलोक आश्रम में भी धारा 144 लागू करने और संत रामपाल के अनुयायियों को बाहर भेजने की बात कही।
17 अप्रैल 2013 : रामपाल समर्थकों की याचिका पर सिविल जज ने प्रशासन को एक सप्ताह तक आश्रम में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए।
24 अप्रैल 2013 : सिविल कोर्ट ने प्रशासन को दोबारा 27 अप्रैल तक यथास्थिति के निर्देश दिए।
25 अप्रैल 2013 : आर्य प्रतिनिधि सभा का सतलोक आश्रम के सामने दो कनाल जमीन खरीदने का खुलासा, जहां आर्य समाज मंदिर बनाने की बात कही गई।
28 अप्रैल 2013 : सिविल जज ने प्रशासन को 8 मई तक आश्रम में यथास्थिति के आदेश दिए। प्रशासन की 30 अप्रैल तक आश्रम खाली कराने की योजना को झटका।
2 मई 2013 : आर्य समाजियों की संघर्ष समिति ने बैठक कर 12 मई को निर्णायक कदम उठाने का फैसला लिया।
8 मई 2013 : कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख, 10 मई तक प्रशासन को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिए।
10 मई 2013 : कोर्ट ने संत रामपाल समर्थकों को बड़ी राहत देते हुए अफसरों को आदेश दिए कि आश्रम की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
12 मई 2013 : 3 की मौत, 100 घायल
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