रोहतक. करौंथा के सतलोक आश्रम को खाली कराने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। एक ओर अधिकारी रणनीति बनाने में लगे रहे, दूसरी तरफ रामपाल समर्थकों को कड़ी सुरक्षा के बीच हिसार के बरवाला ले जाने का सिलसिला जारी रहा। उधर, करौंथा गांव के बाहर ग्रामीण शव के साथ सड़क पर सोते नजर आए। साथ में आसपास नजर रखने के लिए ठीकरी पहरा लगाया गया।
सुबह करीब नौ बजे जिला उपायुक्त द्वारा धारा-144 को आधार बनाकर आश्रम खाली कराने की घोषणा से प्रशासन में हलचल पैदा हो गई। आनन-फानन में आरएएफ, बीएसएफ और सीआरपीएफ की छह कंपनी बुलाई गईं। आश्रम के बाहर सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ती गई तो दूसरी तरफ आसपास के गांवों से हजारों ग्रामीण लाठी-डंडों से लैस होकर करौंथा पहुंचने लगे, जिसे देख प्रशासन की सांसें फूलने लगीं। अंदेशा बनने लगा कि किसी भी समय ग्रामीण भड़क सकते हैं। ऐसे में जल्द से जल्द आश्रम खाली कराया जाए।
पांच घंटे चला वार्ता का दौर
रामपाल समर्थकों को आश्रम खाली कराने के लिए मनाने का सिलसिला पांच घंटे तक चलता रहा। सुबह सवा दस बजे डीसी व एसपी ने आश्रम के अंदर से बातचीत के लिए आश्रम के प्रतिनिधि मास्टर बलवान, मास्टर रामकुमार व मास्टर चांदीराम को बाहर बुलाया। दोपहर एक बजे तक अधिकारियों और आश्रम के प्रतिनिधियों के बीच तीन बार वार्ता टूटी। इसके बाद बरवाला से फोन आने के बाद आईजी अनिल राव व आयुक्त चंद्रप्रकाश आश्रम के अंदर गए।
10 मिनट बातचीत करने के बाद दोनों अधिकारी बाहर आए। इसके बाद डीसी व एसपी को आश्रम के अंदर भेजा गया। करीब पौने तीन बजे दोनों अधिकारी बाहर आए, तो उनके चेहरे पर रामपाल समर्थकों द्वारा आश्रम खाली करने के लिए तैयार होने की खुशी साफ झलकती दिखाई दी। करीब तीन बजे आश्रम खाली करने का सिलसिला शुरू हुआ।
(आगे की स्लाइड में देंखें क्या किया ग्रामीणों ने मांगें पूरी करवाने के लिए)