रोहतक. विजिलेंस की टीम ने मंगलवार दोपहर पीजीआई थाने में छापा मारकर सब इंस्पेक्टर ज्ञान सिंह को रंगे हाथों दबोच लिया। ज्ञान सिंह एमडीयू की छात्रा के पिता और
सोनीपत पुलिस के ईएएसआई सतबीर सिंह से केस दर्ज करने की धमकी देकर 10 हजार रुपए रिश्वत ले रहा था।
बुधवार को आरोपी को अदालत में पेश किया जाएगा। विजिलेंस इंस्पेक्टर विसश्वर सिंह ने बताया कि झज्जर जिले के गांव चमनपुरा निवासी सतबीर सिंह हरियाणा पुलिस में ईएएसआई हैं और उनकी फिलहाल
सोनीपत स्थित कोर्ट चौकी में ड्यूटी है।
मंगलवार सुबह सतबीर विजिलेंस थाने पहुंचा और शिकायत दी कि उसकी बेटी सरिता ने एमडीयू से एमए की है। 2009-10 में सरिता को एससी-एसटी एक्ट के तहत 18 हजार रुपए वजीफा मिला था। पहले पति की मौत के बाद सरिता की दूसरी शादी दिल्ली निवासी सतीश से हुई लेकिन आरोपी ने उसकी बेटी का उत्पीड़न शुरू कर दिया। उसके खिलाफ झज्जर महिला सेल व सदर झज्जर थाने में शिकायत दी गई। सतीश ने इसका बदला लेने के लिए डीसी रोहतक को शिकायत दी कि सरिता ने फर्जी कागजात देकर एमडीयू से वजीफा लिया है। डीसी कार्यालय से पीजीआई थाने में केस की जांच भेजी गई थी।
सहायक डॉक्टर रंगे हाथ पकड़ा
चंडीगढ़. राज्य चौकसी ब्यूरो ने श्रम विभाग, जिला पानीपत में कार्यरत सहायक डॉ. दीपक तनेजा एवं जय पाल सिंह को 5,000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। वे नजफगढ़, नई दिल्ली के प्रमोद कुमार से फैक्टरी का रिकाॅर्ड एवं मज़दूरों के स्वास्थ्य की निरीक्षक रिपोर्ट ठीक करने की रुपए ले रहे थे। ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि अभियुक्तों के विरुद्घ धारा-7 तथा 13 के तहत ब्यूरो के रोहतक स्थित पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया है।
पूरा दिन बैठाकर कह देते कल आना
पीजीआई थाना प्रभारी एमआई खान ने केस की जांच एसआई ज्ञान सिंह को सौंप दी। शिकायतकर्ता सतबीर ने बताया कि एक सप्ताह से उसे थाने में बुलाया जा रहा था। उसने एमडीयू का रिकार्ड भी दे दिया, जिसमें साफ किया गया है कि नियमों के तहत ही सरिता को वजीफा मिला है। इसके बावजूद दिनभर उसे बैठाकर रखा जाता, शाम को कह दिया जाता कि कल आना। आरोप है कि अब ज्ञान सिंह ने उससे कहा कि अगर 20 हजार रुपए रिश्वत नहीं देगा तो उसकी बेटी सरिता, पत्नी व उसके खिलाफ केस दर्ज कर दिया जाएगा। बाद में मामला 10 हजार में तय हो गया।
विजिलेंस ने थाने में मारा छापा, सब इंस्पेक्टर के हाथ लाल
शिकायत दर्ज कर डीएसपी नरेंद्र सिंह ने इंस्पेक्टर विसेश्वर के नेतृत्व में टीम गठित की। साथ में डीसी कार्यालय से नायब तहसीलदार सुभाष चंद्र को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर साथ लिया। जांच टीम पीजीआई थाने के बाहर पहुंची और मेडिकल मोड़ के पास गाडिय़ां खड़ी कर दी। शिकायतकर्ता सतबीर सिंह को 10 हजार रुपए पाउडर लगाकर थाने के अंदर भेज दिया। अंदर एक कोने में सतबीर ने पैसे सब इंस्पेक्टर ज्ञान सिंह को थमा दिए। बाहर आकर जैसे ही सतबीर ने इशारा किया, विजिलेंस की टीम ने अंदर दबिश देकर एसआई ज्ञान सिंह को दबोच लिया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने तलाशी ली तो उसके कब्जे से एक-एक हजार के 10 नोट बरामद किए। पानी डालने पर आरोपी के हाथ भी लाल हो गए। इसके बाद उसे तत्काल रिश्वत मांगने व रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।