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समाज में हाशिए के लोगों की जंग लड़ रहे ये साहित्यकार, कलम से फैला रहे ज्ञान

7 वर्ष पहले
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फोटो- प्रो. अंजना।
रोहतक. खुद की जरूरतों को पूरा कर लेने का हुनर तो बहुतेरों को आता है पर जब बात समाज के भले की हो तो साहित्यकारों की अपनी ही एक दुनिया नजर आती हैं। अपनी कलम के जरिए समाज को नई दिशा देकर ज्ञान का उजियारा कर रहे शहर के साहित्यकार निरंतर लोकप्रियता अर्जित कर साहित्य के क्षितिज पर सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। शहर के जिन साहित्यकार शख्सियतों ने समाज की तरक्की में योगदान देने की पहल की है, उनके लेखन की शुरूआत और प्रेरणा स्रोत से शुरू हुई धुन का फलसफा बयां करती रिपोर्ट। पिपुल कनेक्ट के आज के अंक में इन नामी साहित्यकारों को आपसे रूबरू करा रहे हैं दैनिक भास्कर के संवाददाता....
बस चंद लम्हों में मिल जाए प्रेरणा
मां से बचपन में सुनी कहानियों से प्रेरणा लेकर अब दूसरों को प्रेरणा देने में जुटी एमडीयू के लोक प्रशासन की प्रोफेसर अंजना गर्ग एक लघु कथाकार है। इनका ये लेखक रूप कम ही लोग जानते हैं। हालांकि अपनी लघु कहानियों की तरह ही प्रो. अंजना खुद को उच्च कोटि की लेखिका की श्रेणी में शामिल करने भर से कतराती है। कहती हैं कि मैं उच्च कोटि की लेखिका नहीं हूं। मेरे पास भाव हैं, जिसे शब्दों का रूप दे देती हूं। मेरा मानना है कि आज के दौर में किसी के पास भी समय नहीं है। ऐसे में लोगों को प्रेरणा परक लघु कथाओं के जरिए ही जानकारियां देकर उन्हें आगे बढऩे की प्रेरणा दी जा सकती है। नकारात्मकता के बीच सकारात्मकता का बीज बोकर बेचैन मन को एक दिशा मिलती है। किसी भी तरह का शोषण हो उसके लिए लड़ाई लड़ी जानी चाहिए। ये सामाजिक क्रांति कलम जैसे हथियार से ही लड़ी जा सकती है। मैंने बाल साहित्य पर भी काफी काम किया है। अपने लेखन की शुरूआत भी बाल लेखन से ही की। कहानियों के माध्यम से ही बच्चों के भविष्य को प्रेरणा देने का काम किया।
लेखक मन की चिंता : प्रो. अंजना कहती हैं कि साहित्य लेखन में खास तौर पर समाज में जो कुरीतियां हैं उनपर साहित्यकार अपने नाम के लिए न लिखकर समाज के लिए लिखें, ताकि समाज के दो पक्षों के बीच संतुलन बन सके।
इनकी रचनाएं : प्रो. अंजना ने सौ लघु कथाओं का एक कहानी संग्रह अमलतास के फूल भी तैयार किया है। हालांकि इसका प्रकाशन होना बाकी है। वैसे 250 से ज्यादा कहानियां व 150 के करीब लेख भी लिख चुकी हैं।
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