रोहतक। पीएम
नरेंद्र मोदी का बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को हल्के में लेने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ सकती है। लिंगानुपात कम होने की वजह भ्रूण हत्या पाई गई तो आशा वर्कर और एएनएम की नौकरी जाएगी और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हेल्थ डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेट्री की तरफ से इसके लिए लेटर जारी कर दिया गया है। स्टेट के सभी सीएमओ को जारी लेटर में हेल्थ चीफ सेक्रेटरी ने लिखा है कि लिंगानुपात में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। रूरल और अर्बन में उन इलाकों को फोकस किया जाएगा जहां लिंगानुपात 800 से कम है। ऐसे क्षेत्रों में आशा वर्कर और एएनएम सर्वे कर गर्भवती महिलाओं का रिकॉर्ड रखेंगी। यदि रेकॉर्ड के मुताबिक बच्चा पैदा नहीं हुआ तो उसे भ्रूण हत्या मानकर आशा और एएनएम दीदी को उनके पद से हटाया जाएगा।
तैयार की गांवों की रूपरेखा
जिले के स्वास्थ्य विभाग ने लिंगानुपात की स्थिति सुधारने के लिए रूपरेखा तैयार की गई है। इस नक्शे में वर्ष 2013 व वर्ष 2014 के तमाम आंकड़े अंकित किए गए हैं। सीएमओ डॉ. शिवकुमार ने बताया कि जिले के 146 में से 55 गांव ऐसे हैं, जहां लिंगानुपात 500 से भी कम हैं। इन क्षेत्रों में लिंगानुपात कम होने के कारणों की तलाश की जा रही है। साथ ही जिले में दाई प्रथा पूरी तरह से खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
दाइयों पर होगी एफआईआर
सीएमओ ने बताया कि रोहतक जिले में हर माह करीब दो हजार बच्चों का जन्म होता है। इनमें से 96 फीसदी बच्चे अस्पताल या क्लीनिक में जन्म लेते हैं, जबकि शेष चार फीसदी बच्चों का जन्म दाइयों के द्वारा होता है। उन्होंने बताया कि जिले में करीब 15 दाइयां हैं। फिलहाल इनको प्रसूति न करने की हिदायत दी जा रही है। इसके बाद भी दाइयों ने प्रसूति कराई तो इनके खिलाफ विभाग एफआईआर दर्ज कराएगा।