रोहतक। समाज में अब सिर्फ दो जेंडर मेल और फीमेल ही अध्ययन के लिए नहीं है। अब ट्रांस जेंडर भी अध्ययन के क्षेत्र में जुड़ गया है। इसके अलावा अब समाज का दायरा भी पुरुष केंद्रित न होकर अब बहु केंद्रित होने लगा है। ये बात गुरुवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के सामाजिक मानव विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डा. विनय कुमार श्रीवास्तव ने कही। एमडीयू के महिला अध्ययन केंद्र के तत्वावधान में की जा रही शोध प्रविधि कार्यशाला संपन्न हो गई। लैंगिक अध्ययन के अवधारणात्मक तथा शोध पहलुओं पर आधारित इस कार्यशाला के समापन सत्र की अध्यक्षता एमडीयू कुलपति एचएस चहल ने की।
मुख्य वक्ता प्रो. विनय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि नारीवादी विमर्श एक विशिष्ट सोच है, एक मानसिक अवस्था है। लैंगिक संवेदीकरण का प्रो. विनय कुमार ने समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि इसी के साथ जैव केंद्रित होकर समाज के हर वर्ग पुरुष, महिला, बच्चों के वर्ग में भी सामंजस्य बिठाना जरूरी है। नारीवादी विमर्श के जरिए संसार को समझा जा सकता है। नारी वादी विमर्श एवं लैंगिक संवेदीकरण में साहित्य की अहम भूमिका की भी मुख्य वक्ता ने चर्चा की।
(फोटो- एमडीयू में आयोजित वर्कशाॅप को संबोधित करते डॉ.वीके श्रीवास्तव।)