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आप की जीत में रेवाड़ी की धाक, एक गांव ने दिए दो विधायक

6 वर्ष पहले
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रेवाड़ी। दिल्ली में आम आदमी पार्टी को मिले प्रचंड बहुमत ने रेवाड़ी के छोटे से गांव कनुका को खास बना दिया। इस गांव में रहने वाले दो परिवारों के दो सदस्य आप की टिकट पर पहली बार विधायक बने हैं। बता दें कि आप के थिंक टैंक कहे जाने वाले योगेंद्र यादव भी रेवाड़ी के गांव साहरनवास के मूल निवासी हैं और उनका पहचान पत्र आज भी इसी गांव का है। यादव लोकसभा चुनाव में गुड़गांव सीट से पार्टी का चुनाव लड़ चुके हैं।
शहर से 15 किमी दूर महज 800 आबादी वाले कनुका गांव की अपनी कोई पहचान नहीं थी, लेकिन दिल्ली चुनाव के बाद अच्छी खासी सुर्खियां बटोर रहा है। पालम विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बनी भावना गौड़ और राजेंद्र नगर से विधायक बने विजेंद्र गर्ग इसी गांव से हैं। दोनों का लगाव इतना है कि इस जीत का श्रेय भी गांव के बाबा कुंदनदास नीमवाला आश्रम को देना नहीं भूलते।
दोनों विधायकों के परिजन बेशक 30 सालों से अधिक समय से दिल्ली में रह रहे हैं, लेकिन साल में दो बार गांव जरूर आते हैं। धुलंडी पर्व पर भावना गौड़ और विजेंद्र गर्ग परिजनों के साथ आश्रम में भंडारा लगाते हैं। भास्कर से बातचीत में दोनों ने कहा कि दिल्ली से थोड़ी फुर्सत मिलते ही गांव आएंगे। धुलंडी पर आश्रम में मत्था टेकने आना लगभग फाइनल है।
भास्कर से बातचीत में दोनों विधायकों ने कहा कि सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार को खत्म करना बड़ी बात नहीं है। दिल्ली में होने वाले विकास कार्यों का प्लान लगभग फाइनल हो गया है। अगर कोई ठेकेदार मोहल्ले में सड़क बनवाता है तो उसकी पेमेंट तभी होगी जब लोगों की तरफ से गठित कमेटी अपनी स्वीकृति देगी यानी एनओसी अब कोई अधिकारी नहीं बल्कि गली-मोहल्लों की बनने वाली 11 से 21 सदस्यों की कमेटी देगी। दूसरा सरकारी कामकाज में दलाली को खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय हो जाएगी।
विजेंद्र के पिता का आज भी फर्नीचर का काम
राजेंद्र नगर से विधायक बने विजेंद्र गर्ग के पिता दुलीचंद गर्ग को भी व्यवसाय के लिए 50 साल पहले गांव छोड़ना पड़ा। राजेंद्र नगर आकर फर्नीचर का छोटा सा कार्य शुरू किया। विजेंद्र गर्ग अन्ना आंदोलन से जुड़ गए। पिछले साल के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी से 1200 वोट से हार गए। इस बार भाजपा के आरपी सिंह को 20 हजार 51 वोटों से हराकर पहली जीत दर्ज की।