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  • VC Had To Go On Foot, Leaving The Car Out Of The Office

वीसी को गाड़ी बाहर छोड़कर पैदल जाना पड़ा कार्यालय में

7 वर्ष पहले
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रोहतक. पं. बी डी शर्मा हेल्थ विश्वविद्यालय में एमबीबीएस व बीडीएस के इंटर्न छात्रों के स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर प्रदर्शन करने के बाद अब फिजियोथेरेपी इंटर्न ने भी आंदोलन पर उतर आए हैं। सोमवार को बेचलर इन फिजियोथेरेपी (बीपीटी) छात्रों ने स्टाइपेंड को लेकर कुलपति कार्यालय का घेराव कर जमकर बवाल काटा।
गुस्साए छात्रों ने मुख्य गेट पर धरना दिया और मजबूरीवश कुलपति व अन्य अधिकारियों को गाड़ी बाहर छोड़कर पैदल ही भीतर जाना पड़ा। वीसी ने इस संबंध में दोपहर बाद बैठक बुलाई और चर्चा की। प्रबंधन की ओर से आश्वासन मिलने पर भी छात्रों का आक्रोश कम नहीं हुआ और वे जिद पर अड़े रहे। सुबह ९ से शाम देर शाम तक छात्र धरने पर रहे।
इससे पहले, छात्र इंटर्नशिप के दौरान स्टाइपेंड शुरू करने और लड़कों के लिए हॉस्टल सुविधा की मांग को लेकर सुबह ९ बजे विजय पार्क में एकत्र हुए। नारेबाजी करते हुए छात्र चौ. रणबीर सिंह ओपीडी पहुंचे और प्रदर्शन किया। छात्र रोष जुलूस निकालते हुए निदेशक कार्यालय होते हुए कुलपति कार्यालय पहुंच गए और गेट पर धरना लगाकर बैठ गए।
कुलपति की गाड़ी देखते ही छात्रों ने नारेबाजी शुरू कर दी। छात्रों के विरोध को देखते हुए कुलपति डा. एसएस सांगवान, कुलसचिव डा. सरला हुड्डा, निदेशक डा. चांद सिंह ढुल, डीन डा. वीके जैन को अपनी गाड़ी बाहर ही छोडऩी पड़ी और पैदल कार्यालय के भीतर जाना पड़ा। आनन-फानन में फिजियोथेरेपी की सारी फैकल्टी को अपने कार्यालय में तलब कर लिया और साथ ही मामले को लेकर चर्चा की।
छात्रों का नेतृत्व फाइनल पास कर चुके इंटर्न ने किया। रविंद्र, दीपशिखा, मीनाक्षी, वीना, सुमित, बंटी, कविता, मोनिका काजल, रेणु, गायत्री, संचिता, सोनिया मलिक, ज्योति, अनुष्का, सोनिया, मोनिका यादव, सीमा, सिद्धांत और अनिता मौजूद रहे।
हॉस्टल अलॉटमेंट में भेदभाव
छात्रों ने हेल्थ विवि प्रबंधन पर हॉस्टल अलॉटमेंट करने में भी भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हेल्थ विवि प्रशासन एमबीबीएस, बीडीएस, बी फार्मा समेत रेजीडेंट व इंटर्न डाक्टरों को हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध करा देता है, लेकिन बीपीटी छात्रों को आज तक हॉस्टल सुविधा प्रदान नहीं की है। कुलसचिव डा. सरला हुड्डा ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी एक न सुनी। मामले में कुलपति के साथ भीतर जाकर बैठक करने की बात कही। छात्रों का कहना था कि उन्हें लिखित में आश्वासन चाहिए।