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ठेके बंद हुए तो तस्करी बढ़ी, जनता को नहीं कर पाए खुश और हो गए बंसी फेल

7 वर्ष पहले
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ठेके बंद हुए तो तस्करी बढ़ी, जनता को नहीं कर पाए खुश और हो गए बंसी फेल
भिवानी। कांग्रेस से अलग होकर बंसीलाल ने हरियाणा विकास पार्टी (हविपा) का गठन कर लिया। 1991 के चुनाव में हविपा ने जनता दल अजीत के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। उनमें से 9 सीट हविपा और 3 जनता दल जीती। प्रदेश के लोगों का दिल जीतने के लिए बंसीलाल को कोई विशेष मुद्दा नहीं मिल रहा था।
1995 में हविपा सुप्रीमो बंसीलाल गांव-गांव का दौरा कर रहे थे। उनका ध्यान शराब के खिलाफ गांवों में होने वाली पंचायतों की तरफ गया तथा उन्होंने इसे चुनावी मुद्दा बना लिया। हविपा की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ने लगा। वे जहां जाते, वहां पर शराबबंदी के खिलाफ लोगों की भीड़ उमड़ने लगी। 1996 के चुनाव में हविपा व भाजपा ने मिलकर चुनाव लड़ा। गठबंधन ने 44 सीटों पर जीत दर्ज की।
निर्दलीय विधायकों का साथ लेकर बंसीलाल मुख्यमंत्री बन गए। अपने किए वादे के अनुसार उन्होंने शराबबंदी का कानून पास कर उसे लागू कर दिया। हालांकि इसके बाद इतनी अव्यवस्था फैली की बंसीलाल की सरकार ही गिर गई। इसके बाद बंसीलाल दोबारा कभी उभर नहीं सके। बाद में हविपा का कांग्रेस में विलय हो गया।
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