झज्जर. मेरा बेटा देश के लिए लगातार मेडल तो ला रहा है, लेकिन उसे हरियाणा सरकार नौकरी तो नहीं देती। मैं भी चाहती हूं कि बेटा हरियाणा पुलिस में डीएसपी बने। बेटा तो देश के सपने पूरे कर रहा है, लेकिन बेटे और परिवार का सपना अब तक पूरा नहीं किया गया।
झज्जर के खुड्डन गांव निवासी 19 वर्षीय पहलवान बजरंग पूनिया की मां ओमप्यारी ने यह दुख उस समय बयां किया, जब उनका समूचा परिवार बजरंग के एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने की खुशी मना रहा है।
इंचियोन में पुत्र द्वारा कांस्य पदक जीतने के बाद जब दैनिक भास्कर ने उनकी मां की इच्छा पूछी तो वह बोलीं कि बजरंग खेलने जाने से पहले मुझसे जो वादा करके गया वह उसने पूरा किया। हंगरी में हुई विश्वचैंपियनशिप में उसने रजत जीता। बीते माह काॅमनवेल्थ में भी कांस्य लाया था। उन्होंने बताया कि उनके बेटे की इच्छा डीएसपी बनने की है, लेकिन सरकार उसके सपने को पूरा नहीं कर रही। दो साल से लगातार इसकी मांग की जा रही है। ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाने का इंतजार और है फिर घर में बहू लाने की तैयार है।
पति ने कुश्ती छोड़ी तो पुत्र ला रहा है मेडल
बजरंग की मां ओमप्यारी ने बताया कि जब उसकी शादी बलवान से हुई तब वह कुश्ती खेला करते थे। हालांकि परिवार की जिम्मेदारियों के चलते उनको अपना यह खेल बीच में ही छोड़ना पड़ा। पति बलवान जो कमाल कुश्ती में नहीं कर पाए अब हमारा बेटा बजरंग कुश्ती में विश्वभर झंडे गाड़ रहा है।
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