रिमझिम फुहार से तापमान में आई गिरावट, पीला रतुआ से राहत
वातावरण में हो रहे बदलाव के कारण शहरवासी और ग्रामीण सभी चर्चा करने लगे हैं। क्योंकि घंटे में कब धूप रहेगी और कब बरसात जाएगी इस बारे में कुछ कह पाना सही नहीं है। मौसम इन दिनों कुछ इसी तरह का हो रहा है।
शुक्रवार को दिनभर धूप खिली रही। जबकि शनिवार अल सुबह आसमान से बूंदें गिरने लगी। जिसके साथ तेज हवा भी चल रही है। दोपहर बाद करीब दो बजे फिर से बरसात होने लगी। बरसात भी हल्की नहीं थी। सड़कों और गड्ढों में पानी भर गया। सोनीपत के बरोटा इलाके में हल्की ओलावृष्टि भी हुई है। जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। वहीं कृषि अधिकारियों का कहना है कि इस बरसात से गेहूं उत्पादक किसानों को बहुत फायदा होगा। तापमान में करीब दो डिग्री सेंटी ग्रेट तक की गिरावट दर्ज की गई है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि यदि ओलावृष्टि होती है तो सरसों की फसल सहित गेहूं की आगेती किस्म की फसलों को नुकसान हो सकता है। हालांकि हल्की ओलावृष्टि से कोई नुकसान नहीं होगा।
12से 15 प्रतिशत तक फायदा : इससाल जिले में एक लाख 45 हजार हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की खेती की जा रही है। वातावरण में जितनी भी नमी रहेगी गेहूं के लिए उतना ही फायदा होगा। जहां तक सवाल दूसरी फसलों का है तो इसमें गन्ने की फसल में लगने वाला कीड़ा भी बरसात से धुल जाता है। जिसका फायदा यह होगा कि गन्ने की मिठास कम नहीं होगी। साथ ही गन्ना खराबी से भी बचेगा। नमी से गेहूं की पैदावार में करीब 10 से 15 प्रतिशत अधिक पैदावार की संभावना है।
^यह बरसात फसलों के लिए खाद का काम करेगी। किसानों को इससे बहुत फायदा होगा। ओलावृष्टि अगर तेज होती है तो कुछ नुकसान होने की आशंका बन सकती है, लेकिन हल्की बरसात से कोई नुकसान नहीं होता।\\\'\\\'वीरेंद्र आर्या,कृषि उप निदेशक सोनीपत।