अभी सिर्फ घोषणा तक ही सीमित
प्रदेशके खिलाड़ियों का बीमा होगा। प्रदेश सरकार ने जब यह घोषणा की तो सैकड़ों खिलाड़ी अपने भविष्य को लेकर निश्चित हुए थे, जो हर समय खेलते समय चोटिल होने के भय से ग्रस्त रहते हैं। घोषणा तो हुई, लेकिन वह फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी। सरकार ने पहले घोषणा की और फिर उसे अपनी महीनों की मशक्कत के बाद तैयार कर 12 जनवरी 2015 को घोषित खेल नीति तक में शामिल किया। इस घोषणा के जरिए खूब वाहवाही भी बटोरी गई, लेकिन एक साल से ऊपर हो, आज हाल यह है कि संबंधित विभागीय कार्यालय में इसका जिक्र तक नहीं है।
अगर खेलते वक्त कोई खिलाड़ी चोटिल हो जाता है तो बीमा कंपनी उसकी आर्थिक मदद करेगी। बीमा के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को किसी प्रकार का भुगतान नहीं करना होगा। खेल मंत्री अनिल विज ने नई खेल नीति के तहत ये घोषणा की थी। खेलते वक्त खिलाड़ियों के चोटिल होने पर इलाज परिजनों को अभी कराना पड़ता है। प्रतियोगिता के अलावा अभ्यास के दौरान भी अगर कोई खिलाड़ी चोटिल हो जाता है उसे भी बीमा कंपनी की तरफ से मुआवजा देने का प्रावधान रखा गया था। इसमें दस हजार से तीन लाख रुपए तक का मेडिक्लेम था। बताया गया है कि इस प्रक्रिया के शुरुआती चरण में डीएसओ कार्यालय में फार्म भेजे भी गए थे।
प्रदेश की ओर से हॉकी प्रतियोगिता खेल चुके अरविंद सरोहा ने बताया कि हमारे खेल में अक्सर चोट लग जाती है, फैक्चर तक होता है। जबकि फुटबाल के राष्ट्रीय खिलाड़ी रोहित ने कहा कि अभ्यास करते समय उनका टखने में चोट लगी और वह खेल से करीब तीन महीने तक दूर हो गया। इलाज का खर्च आया वह अलग। इसलिए जब सरकार ने घोषणा की थी तो अच्छा लगा था कि सरकार खिलाड़ी के दर्द को समझ रही है, लेकिन वह अब वहम मात्र लग रहा है।
^खिलाड़ियों के इंश्योरेंस कराने की फाइल प्रॉसेस में है। जल्द ही यह कार्य पूरा हो जाएगा इसके बाद प्रदेश के सभी खिलाड़ियों की इंश्योरेंस कराई जाएगी।\\\'\\\'ओपी शर्मा,अतिरिक्त खेल निदेशक।