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राहत : दवाओं की कमी दूर करने के लिए होगी खरीद

5 वर्ष पहले
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सामान्यअस्पताल से इलाज करवाने वाले मरीज हाल में परेशान हैं, खासकर ओपीडी, गायनी इमरजेंसी वार्ड में उन्हें परेशानी हो रही है। यहां मरीज को देने के लिए जरूरी दवाओं की कमी बनी हुई है। जिसके चलते मरीजों को अपनी जेब से पैसे खर्च कर बाहर से दवा परचेज करनी पड़ रही है। गंभीर समस्या पर आखिरकार अब स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी है। मरीज को परेशानी हो इसके लिए अब 20 लाख रुपए का बजट अस्पताल को दिया गया है। वेयर हाऊस से जिन दवाओं की डिमांड पूरी नहीं होगी, उन्हें अब इस बजट से खरीदा जा सकेगा। मरीजों को इससे बड़ी राहत मिलेगी।

इनदवाओं की कमी : अस्पतालकी ओपीडी इमरजेंसी वार्ड में हाल में सांस, एलर्जी, स्किन, स्टीम देने वाली दवा की कमी बनी हुई है। जबकि इन रोगों के मरीज हर दिन काफी संख्या में अस्पताल पहुंचते हैं। इन्हें बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि कई मरीज जो दवा नहीं खरीद सकते, उन्हें कई बार डॉक्टर खुद दवा के लिए पैसे देते हैं।

^मरीजों की परेशानी को देखते हुए 20 लाख का बजट दवाओं की खरीद के लिए सामान्य अस्पताल को दिया गया है। ओपीडी इमरजेंसी वार्ड में कई बार अहम दवाओं की कमी हो जाती है। यह दवा अब इस बजट से परचेज की जा सकेगी।\\\'\\\' डा.जसवंत पूनिया, सिविलसर्जन

अस्पताल में जन औषधि योजना लागू करने की हरकत स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई थी, लेकिन यह योजना अभी सिरे नहीं चढ़ पाई है। इस योजना के तहत अस्पताल में नो-प्रोफिट, नो लॉस पर प्राइवेट दवा स्टोर खोला जाता। जिससे मरीज को काफी राहत मिलती। बताया जा रहा कि इस तरह की योजना पर पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला की सरकार ने काफी दिन काम किया था। अस्पताल के अंदर दी जरूरी दवा मरीज को रियायती दर पर मिलती थी।

20 लाख रुपए का जो बजट मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के तहत मिला है वह ओपीडी इमरजेंसी वार्ड पर ही खर्च किया जाएगा। यहीं पर मरीज को दवा मिलने से सबसे ज्यादा परेशानी होती है। कई बार डॉक्टर दवा लिख देता है जबकि वह दवा अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं होती। ऐसे में मरीज की परेशानी बढ़ जाती है।

देवेंद्र, अजय, प्रदीप, रवि ने बताया कि हड्डी के आपरेशन के दौरान मरीज को सामान बाहर से खरीदना पड़ रहा है। यह सामान काफी महंगा होता है। यदि सरकार इस परेशानी को दूर करने के लिए पीपीपी अर्थात प्राइवेट पब्लिक पार्टनशिप पर काम करे तो मरीजों को बढ़ी राहत मिल सकती है। सीटी स्केन की तरह ही इस पर भी स्वास्थ्य अधिकारियों को सोचने की जरूरत है। जरूरतमंद को इससे बढ़ा लाभ होगा।

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